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    Tuesday, 17 January 2017

    ग्रेट बिज़नस आईडिया हासिल करने के 3 आसान कदम by seeken


    किसी व्यवसाय को शुरू करने के लिए क्या चाहिए? पैसा? जगह ? जानकारी? हां, यह सब भी लेकिन सबसे पहले क्या ? आईडिया , उपाय या कहे युक्ति। पे टीएम्  हो या फेसबुक या माइक्रोसॉफ्ट , इन सबके पीछे केवल एक यूनीक आईडिया था और आईडिया के साथ थी काफी सारी मेहनत और लगन।  इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको बिज़नस आईडिया के तीन सरल कदम बता रहा हूँ।

    इसी कहानी में है तीनो स्टेप्स 
    1854 , सोहो , इंग्लैंड में कॉलेरा नाम की बिमारी फ़ैल गयी थी। जिसके कारण बहुत से लोगो की मौत हो गयी थी और किसी को समझ नहीं आरहा था कि इसके पीछे कारण क्या है और यह कैसे फ़ैल रही है। अनुमान लगाया जारहा था कि यह ज़रूर हवा के कारण हो रही है। उसी वक़्त एक डॉ थे जिनका नाम जॉन स्नो था।  जॉन स्नो इस सवाल के जवाब की तलाश में लग गए और उन्होंने एक मानचित्र यानी मैप बनाया।  उस मैप में वो कॉलेरा से सम्बंधित हर एक केस की जगह को पिन करते है।  मैप बनाते बनाते डॉ स्नो इस नतीजे पर पहुँचते है कि सभी बीमार और मर चुके लोगो का सम्बन्ध शहर में लगे एक पानी के पम्प से था यानी मरीज़ या मृतक उस दिन, जिस दिन वो उस पम्प के आस पास गए थे , के बाद से मरीज़ होना शुरू हुए। इसके बाद वो इस निष्कर्ष पर पहुँचते है कि यह बीमारी हवा से नहीं बल्कि पानी से फ़ैल रही है इसके बाद वो अपनी रिसर्च सरकार को दिखा कर उस पानी के पम्प की सप्लाई बंद करवा देते है , तदुपरान्त ,सोहो में यह बीमारी घटती चली जाती है।  इससे दुनिया को एक बहुत बड़ी चीज़ पता चल जाती है। 

    अब इस कहानी पर किताब के लेखक ने रिसर्च की तो पाया कि उनको ऐसी कई चीज़े पता लगी जो बहुत से लोग नहीं जानते थे।  अधिकतर लोगो को लगता था कि डॉ स्नो को मैप बनाने के बाद ही पता चला कि बीमारी की असल वजह पम्प है, जबकि सच्चाई यह है की डॉ को इसका अंदाज़ा पहले ही लग गया था।  हकीकत में जो मैप उन्होंने बनाया था वो भी केवल सरकार को अपनी बात साबित करने के लिए बनाया था , यहाँ तक की कोलेरा पर रिसर्च करना भी उनका अहम् काम नहीं था , बल्कि वो इसे अपने काम के साथ साथ कर रहे थे क्योकि वो अपने रूटीन से ऊब चुके थे। इस रिसर्च को डॉ स्नो ने अकेले नहीं की थी बल्कि इसमें उनका साथ एक पादरी हेनरी वाइट हेड ने दिया था , जो विज्ञान क्षेत्र से बिलकुल भी परिचित नहीं थे लेकिन फिर भी इस रिसर्च का सबसे अहम् बिंदु वही थे क्योकि उनकी सोच और समझ डॉ स्नो से एकदम अलग थी इसलिए इस चीज़ से रिसर्च में काफी मदद मिली थी क्योकि उनकी जान पहचान शहरवासियों से अच्छी थी।  इसी कारण डॉ स्नो के लिए अलग अलग केसेस को ट्रैक और डाटा जमा करना आसान हो गया था और उसी आधार पर मैप बनाया गया था। 

    अब इस कहानी से क्या सीख मिलती है और आखिर कैसे हम इस कहानी से क्या सीख सकते है। लेखक ने अपनी पुस्तक में 3 पॉइंट बताये है 

    1 . लिक्विड नेटवर्क : आपको क्या लगता है कि ज़्यादातर आईडिया कहा से आते है ? क्या किसी लैब में बनते है या कही पैदा किये जाते है?  नहीं , ज़्यादातर आईडिया कभी अकेले नहीं आते बल्कि आईडिया तब आते है जब कई लोग एक जगह बैठ कर अपने अपने आईडिया और व्यूज को शेयर करते है। इंग्लॅण्ड में आईडिया और इनोवेशन तब ज़्यादा बढ़ गए थे जब लोगो ने शराब पीने के बजाये कॉफ़ी शॉप में जाकर समय व्यतीत करना शुरू किया था और अपने आईडिया एक दूसरे से शेयर करने लगे । इसलिए हमे भी एक नेटवर्क बनाना चाहिए जहां हर तरह के लोगो का स्वागत किया जाए और उनके आइडियाज का आदान प्रदान किया जाए क्योकि इससे हमे अलग अलग चीज़ों के बारे में जानने को मिलेगा और कई आईडिया मॉडिफाई होकर एक ग्रेट आईडिया बनने की तरफ बढ़ेगे । फेसबुक, ओला कैब्स , व्हाट्सएप्प यह सभी आईडिया एक से ज़्यादा लोगो के आईडिये का ही निचोड़ है। 

    2.  एक जैसा रूटीन तोड़िये : कोई आदमी  जब प्रतिदिन एक ही काम करता है तो उसका दिमाग अलग अलग आईडिया बनाने बंद कर देता है क्योकि उसे इसकी ज़रुरत नहीं रहती इसलिए जैसे ही वो अपना रूटीन तोड़कर कुछ अलग करता है या नए लोगो ने जाता है या शहर से बाहर घूमने जाता है तब उसका दिमाग अलग तरह से नयी नयी बाते सोचने लगता है जिससे उसको आईडिया आने के चान्सेस बढ़ जाते है , इसलिए आप भी अपनी ज़िन्दगी में बदलाव लाते रहे , नए नए लोगो से मिले नई जगह जाइये , नयी कलाये सीखिये। 

    3 . आईडिया समय के साथ सुधर कर निकलता है : ज़्यादातर लोग समझते है कि ग्रेट आईडिया बस एक झटके में आजाते है।  यही दिमाग की घंटी बजी और आईडिया हाज़िर, लेकिन ऐसा नहीं है , बर्बन एक एप्प थी जिसमे युवा आकर गेम वगेहरा खेलते थे , बर्बन कामयाब नहीं हो रही थी लेकिन उसके डेवलपर ने देखा कि लोगो को इसका केवल एक फीचर ही पसंद आरहा है और वो है फोटो को फ़िल्टर करके डालना, बस इसके बाद काफी संघर्ष करने वाली इस एप्प ने खुद को ग्राहकों की मांग के हिसाब से बना दिया और आज उसको हम इंस्टाग्राम के नाम से जानते है। इसी तरह टीम बर्नर ने एक किताब पढ़ी थी फिर 20 साल उसपर काम किया तब जाकर वर्ल्ड वाइड वेब बना जिसे आज हम सब इस्तेमाल करते है। ऐसे ही बहुत से उदाहरण आपको इस विडियो " लीन स्टार्टअप बाय सीकन (हिंदी )" में देखने को मिल जायेंगे। इसलिए आप यह मत सोचो की आप सोचते रहोगे और एक दिन आईडिया आजायेगा बल्कि आप अपने नार्मल आईडिया पर काम करना शुरू कर दो, समय के साथ साथ उसमे सुधार के कई मौके आपको मिलेंगे या इसी बीच आपको कोई दूसरा आईडिया आजायेगा जो आपको कामयाब बना देगा। 



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