सोचिये, आप भारतीय है और कोई सरकारी अधिकारी आपको श्रीलंकन कह दे , बांग्लादेशी कह दे , चीनी या जापानी कह दे या पाकिस्तानी कहदे तो आपको कैसा लगेगा ? उत्तर भारतीयों के साथ भेदभाव इस देश में नया नहीं है। ऐसे कई उदाहरण है जो हमारे समक्ष आते है जिनमे उत्तर भारतीयों को सताया जाता है। किसी भी प्रकार से अपने ही देश में भेदभाव एक पीड़ादायक स्थिति है और ऐसी ही स्थिति से पुनः दो चार हुए मणिपुर के छात्र
मणिपुर के छात्रों का एक दल ताजमहल देखने आगरा आया हुआ था जहां प्रवेश द्वार पर CISF अधिकारी ने उनको रोककर भारतीय होने का सबूत मांगा। छात्र इम्फाल के केंद्रीय एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से सम्बन्ध रखते थे और शैक्षिक यात्रा पर निकले थे। अधिकारी ने उनको केवल इसलिए रोका क्योकि वो "विदेशियों जैसे लग रहे थे "
आप सोच रहे होंगे कि सुरक्षा कारणों के चलते छात्रों को रोका गया लेकिन नहीं , रोकने का कारण थे प्रवेश टिकट का मूल्य जो भारतीयों के लिए 40 रुपया और विदेशियो के लिए 1000 रुपया है।
छात्रों ने अधिकारी को अपने यूनिवर्सिटी का "राष्ट्रीय यात्रा" का पत्र और आई डी कार्ड दिखाया लेकिन अधिकारी ने सिर्फ आधार कार्ड ही दिखाने की मांग की। इसके बाद छात्रों , प्रोफेसर और अधिकारियों में वाद विवाद बढ़ गया
आखिरकार स्थानीय पुलिस को बीच में आना पड़ा और प्रवेश मिल गया लेकिन छात्रों ने ASI अधिकारियों के खिलाफ प्रताड़ना और भेदभाव की शिकायत दर्ज करा दी.
पर्यटन पुलिस के अधीक्षक आर पी पांडे ने कहा
" छात्रों की शिकायत पर कि CISF ने उनके साथ बदसलूकी की, हम मौके पर पहुचे और छात्रों को प्रवेश कराया "
इधर ASI के आला अधिकारियों ने जांच के आदेश देते हुए सीसीटीव फुटेज की मांग की है।
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