झारखण्ड में ईद उल अज़हा के मौके पर गाय काटने की अफवाह को लेकर एक मुस्लिम परिवार के तीन घरो में आग लगा दी गयी। मामला झारखण्ड के गिरिध ज़िले के नईटांड़ ग्राम का है जहां शनिवार को गुस्साई भीड़ ने एक एक मुस्लिम परिवार के तीनो घरो में आग लगा दी। घटनास्थल राजधानी रांची से 185 किलोमीटर दूर है
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट अनुसार रहमान मिया पर लोगो ने यह आरोप लगाया कि उन्होंने गाय काटकर उसका मांस अपने सभी जानने वालो में वितरित किया।
गिरिध के पुलिस सुप्रीटेंडेंट अखिलेश बी वारियर ने बताया कि स्थिति अब काबू में है लेकिन फिर भी पुलिस बल तो तैनात कर दिया गया है।
जून में भी उस्मान अंसारी नाम के व्यक्ति के घर को इसी अफवाह के कारण आग के हवाले कर दिया गया था। तब पीड़ित के साथ 50 पुलिसवाले भी गंभीर रूप से घायल हुए थे क्योकि भीड़ ने भारी पत्थरबाज़ी की थी
अभी पुलिस ने 6 लोगो को गिरफ्तार किया है और डिप्टी कमिशनर ने खुद गाँव आकर मोर्चा संभाला
ईद से कुछ दिनों पहले भाजपा सरकार ने विज्ञापन लगा के यह जानकारी दी थी कि बकरा ईद पर राज्य कानून के अंतर्गत गौवंश काटना अपराध माना गया है। कुछ दिन पहले भी बीफ लेजाने शक में एक व्यक्ति को मार डाला गया था।
सवाल उत्पन्न होता है कि यह देश की जनता इतना सेलेक्टिव क्यों है ? भाजपा नेताओ की कई गौशालाओ में 200-300 गाये मृत पायी गयी , नार्थईस्ट में भाजपा ने गाय खाने को प्रतिबंधित न करने का ऐलान किया। कुछ पिछले महीने गोरखपुर के अस्पताल में 69 बच्चो की मौत हुई और अब फरुखाबाद से 49 बच्चो की मौत आरही है। आखिर देश की जनता या भाजपा के कार्यकर्ता इन हादसों पर क्यों नहीं बोलते? क्या देश में यही जंगल राज चलाया जायेगा कि कही भी 100 लोगो की भीड़ मात्र अफवाह पर इंसानी जान लेना शुरू करदे। ऐसे होने पर इस देश के वासी खुद को एक गहरे संकट में ही डाल लेंगे। सरकार से आशा है की असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्ती से पेश आये
Sources : Hindustan Times
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