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    Monday, 4 September 2017

    रोहिंग्या समुदाय के सामने उभरा खाद्य संकट, बर्मा फ़ौज ने बच्चो को जलाया ज़िंदा, किये सर कलम

    A Rohingya ethnic minority from Myanmar carries a child in a sack and walks through rice fields after crossing over to the Bangladesh side of the border
    म्यांमार में अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी और बर्मा सैनिको के बीच टकराव के बाद विस्थापित हुए रोहिंग्या समुदाय के समक्ष खाद्य एवं स्वास्थ सेवाओं का संकट उत्पन्न हो गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक म्यांमार सरकार ने सहायता एजेंसियों पर रोहिंग्या विद्रोहियों का समर्थन करने का आरोप लगाया था जिसके पश्चात संयुक्त राष्ट्र और अन्य समूहों ने अपनी राहत कार्य गतिविधियां बंद कर दी हैं.

    गुरुवार को म्यांमार की राष्ट्रीय नेता आन सांग सू की के प्रवक्ता जॉ ह्ताय ने ट्वीट किया था कि विश्व खाद्य कार्यक्रम नागरिकों के लिए है या आतंकवादियों के लिए?

    गौरतलब है की 2012 के रोहिंग्या नस्लकुशी के बाद से रखाइन राज्य की राजधानी सितवे तथा अन्य जगहों पर बने शिविरों में  लगभग 1.2 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं.
    म्यांमार : राहत शिविरों में रह रहे सवा लाख रोहिंग्या मुस्लिमों को खाने के लाले पड़े
    बीते शुक्रवार को अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी ने रखाइन प्रांत में पुलिस चौकियों और एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था. इसके बाद छिड़े संघर्ष में अब तक 400 लोगो की मृत्यु हो चुकी है. संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय के प्रवक्ता पियरे पेरोन ने कहा, ‘रखाइन राज्य में रहत कार्यो में व्यवधान आने से कई लोगों को सामान्य खाद्य संकटउत्पन्न हो गया है तथा  प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.’

    सूत्रों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के कर्मचारी रोहिंग्या मुस्लिमों के बड़े कैंपों में क्लीनिक चलाने से डर रहे हैं, जिससे इनके बंद होने का खतरा बढ़ गया है.इस बीच संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता समूहों ने अपने सभी गैर-जरूरी स्टाफ को भी निकाल दिया है. वहीं, विश्व खाद्य कार्यक्रम से जुड़े ठेकेदारों ने भी सितवे और अन्य शिविरों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने से इनकार कर दिया है.



    टेलीग्राफ की इस खबर  के मुताबिक बर्मा आर्मी रोहिंग्या समुदाय के बच्चो का सर कलम तथा उनको जला रही है . ट्विटर पर ह्यूमन राइट्स वाच के एशिया डिवीज़न के डिप्टी डायरेक्टर फिलिम कइन ने लिखा कि  औंग सान सू की अपने प्रोपगंडा को और बढ़ाते हुए काम किया है और यह उनके नेतृत्व की असफलता है



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