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    Sunday, 2 July 2017

    10 करोड़ की उधारी और 45 कचहरी मुक़दमे भी इनको सफल उद्यमी बनने से रोक न सके


    याद कीजिये जब आप 22 वर्षीय थे, एक मस्त, साहसिक युवक या युवती जिसके सामने जीवन में हज़ारो सुनहरे अवसर इंतज़ार कर रहे थे।

    लेकिन संदीप रिअत के लिए वो उम्र ऐसी थी जब उन्होंने अपने पिताजी की एक खस्ता हाल व्यवसायिक यूनिट अकाल स्प्रिंग्स लिमिटिड का ज़िम्मा अपने जवान कंधो पर लिया। संदीप अपने पिता की कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर तब बनी जब यह फर्म 10 करोड़ की उधारी और 45 अदालती और कचहरी मामलो में संलिप्त थी।

    संदीप ने बिज़नेस मैनेजमेंट की पढ़ाई समाप्त करके अपने पिता की कम्पनी को 2002 में ज्वाइन किया था. दुर्भाग्य से उनके पिताजी की मृत्यु 2004 में हो गयी थी।  इसके बाद कचहरी के सभी केसेस, बैंक रिकवरी एजेंट्स के कॉल और तकादा तथा 250 कर्मचारियों की कई महीनों की तनख्वाह जैसी जिम्मेदारियां उनके सर पर आगयी थी।

    वो सामने आने वाली हर चुनौतियों और दिक्कतों के बारे में भली भांति जागरूक ही चुकी थी और खुद को इस बात के लिए उन्होंने मना लिया था कि इन सब चुनौतियों से उनको अब खुद ही लड़ना पड़ेगा।  इसके बाद मात्र 4 साल में ही उन्होंने एक दम तोड़ते उद्योग में जान फूंक कर अच्छा खासा लाभदायक व्यवसाय बना लिया।

    संदीप को रोज़ाना प्लांट में 20 ऐसे लोगो का सामना करना पड़ता जो उनके लेनदार थे। हर रोज़ किसी न किसी के पैसे देने के लिए उनको कहा जाता, यही नहीं कचहरी में इतने केस चल रहे थे कि उनको समझ नहीं आरहा था कि किस केस की तारिख पर जाए और किसकी नहीं। उनके करीबी और शुभचिंतक उनको भाग जाने की राय देते ,कहते सब कुछ बेच कर निकल जाओ यहाँ कुछ नहीं होता , कोई आज तक पकड़ा नहीं गया तुम्हे भी कुछ नहीं होगा लेकिन इरादों की पक्की और अपने पिता के मान सम्मान की इज़्ज़त करने वाली संदीप ने अपने सामने आई चुनौतियों से लड़ने ठानी।

    संदीप को अब अपनी यूनिट शुरू करके उसे लाभदायक बनाना था परन्तु उसके लिए उनके पास पैसे नहीं थे। संदीप को 1 नहीं 2 नहीं पूरे 7 राष्ट्रीय बैंकों ने लोन देने से मना कर दिया। संदीप  कहती है : " कोई हम पर भरोसा करने को तैयार नहीं था , बैंक वाले कहते आप एक महिला है आपसे कैसे एक इंडस्ट्री चलेगी ? सिर्फ एक बैंक ने हम पर भरोसा किया और आखिरकार हमे कुछ लोन मिला जिससे हमारा काम शुरू हो सका।  मैंने मेरे स्टाफ मेंबर्स से मुझ पर भरोसा करने को कहा और यह भी कहा कि कुछ और समय के लिए बिना मज़दूरी के काम कर लीजिए।  स्टाफ मेंबर मान गए।  तब मैंने एक बड़ा फैसला और लिया। मैंने प्लांट की 6 एकड़ ज़मीन में से 4 एकड़ बेच दी और सभी मशीनों को बचे हुए 2 एकड़ में रखवा दिया जिसकी वजह से मैंने सभी लेनदारों के पैसे चुका दिए।


    आज अकाल स्प्रिंग्स का वर्षिक कारोबार 20 करोड़ रुपया है और यह अन्य राज्यों में भी फल फूल रहा है।
    संदीप फख्र से बताती है : "जानी मानी कंपनी जैसे टाटा और महिंद्रा भी हमारी क्लाइंट्स है। हम खाड़ी के देश, अफ्रीका और यूरोप के छोटे ब्रांड्स को भी अपना माल सप्लाई करते है। हम बड़े ब्रांड्स के साथ कम ही काम करते है क्योकि उनसे बात करने से लेकर व्यापार करने तक सब उनके नियम अनुसार ही करना पड़ता है।"

    संदीप जी को पंजाब के मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल की ओर से 2011 में प्रमाण पत्र भी दिया गया है। हिंदी उस्ताद बहन संदीप रिअत के सफल कारोबार की कामना करती है निसंदेह यह सभी के लिए प्रेरणा स्रोत्र है

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