जुगाड़ में हम भारतीयो को कोई सानी नहीं, बड़े से बड़े जुगाड़ हमने छोटी से छोटी जगह में फिट किये है। हम तो इतने टैलंटेड है कि बैटरी पर ज़बान लगा के बता देते है कि उसमे चार्ज कितना है और बाइक हिला के बता देते है कि तेल कितना है। अब भवन निर्माण में भी हमने एक नयी जुगाड़ तकनीक का इज़ाद किया है और वो है बोतल वाली ईंट।
'बोतल वाली ईंट' नामक यह जुगाड़ू तकनीक हमारे देश की ईजाद है लेकिन दुनिया भर ,खासतौर में अफ्रीका में काफी प्रचलित हैं।
इसे बनाना बहुत आसान है बस एक खाली प्लास्टिक की बोतल लीजिये और उसमे रेत भर कर टाइट बन्द कर दीजिये। इस तकनीक ने भवन निर्माण की लागत एक चौथाई कम कर दी है। ग्रामीण इलाको में 200 से 400 स्क्वायर फ़ीट का घर केवल 30000 रूपए में बन कर तैयार हो रहा है। प्लास्टिक बोतल की ईंट न केवल सस्ती है बल्कि मज़बूत और ठंडी रहती है।
बोतल में रेत भरकर बनाई गयी इस ईंट की दीवार आम दीवारो से 20 गुना ज़्यादा मज़बूत भी है और वो भी बिना अम्बुजा सेमेंट लगाये। साथ हो यह भूकंप विरोधी और बुलेट प्रूफ भी है।
अफ्रीकी और साउथ अमरीकी देश धड़ल्ले से इसका इस्तेमाल कर रहे है वही भारत में यह अभी भी अनजानी के दौर से गुज़र रही है पर मुझे आशा है इसपर नज़र अवश्य जल्दी जायेगी क्योकि यह न केवल जेब के लिए अच्छी है बल्कि बेघरों और प्लास्टिक की समस्या से लड़ने में बेहद उपयोगी है।
एक छोटे से आईडिया ने कैसे भवन लागत और प्लास्टिक के कचरे को समाप्त कर दिया, है न अजूबा। यदि आपको पसंद आया और बनाना चाहते है तो हम आपको कहेंगे निम्न चित्र एक बार अवश्य जांच लें
यह भी पढ़िए
सलाम : अपनी जान दांव पर लगाकर इस व्यक्ति ने बचाई थी 300 बर्मा मुस्लिम की ज़िन्दगी
जुगाड़ टेक : डेढ़ लाख प्लास्टिक की बोतलों पर ही बना डाला अपना टापू
लगभग 4 फुट का है दुनिया का सबसे तंग घर, बाथरूम,बैडरूम पार्किंग जैसी सुविधा से लैस
पडोसी देश के इस त्यौहार में भीड़ द्वारा नोंच नोंच कर बकरे की ली जाती है जान
स्पांसर पोस्ट







No comments:
Post a Comment