यदि पुलिस आप को कभी बिना किसी आधार के गिरफ्तार करती है तो न्यायलय में दावा करने पर आपको मुआवजा मिल सकता है। उच्च्तम न्यायलय ने मध्य प्रदेश पुलिस को अमेरिका में रहने वाली अप्रवासी महिला डा. रिनी जौहर और उसकी मां गुलशन को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। पुलिस ने इन माँ बेटी को निराधार तरीके से गिरफ्त में लिया था। पुलिस को तीन महीने में मुआवजा देना होगा।
यह आदेश जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस शिवकीर्ति सिंह की पीठ ने सुनाया। उन्होंने कहा कि अकारण गिरफ्तारी कर दोनों महिलाओं की स्वतंत्रता का हनन और अपमान हुआ। न्यायलय ने पाया कि पुलिस द्वारा, धोखाधड़ी के मामले में सीआरपीसी की धारा 41 ए और 41 सी में दी प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया।न्यायालय ने यह भी कहा कि जिस मामले में गिरफ्तार किया गया वह धोखाधड़ी से मेल नहीं खाता था अतः अकारण गिरफ्तारी से दोनों महिलाओं के मान-सम्मान को क्षति पहुंची है लिहाजा उनको क्षतिपूर्ति का अधिकार बनता है।
अदालत ने एडवोकेट सुनील फर्नांडीस को अपने मित्र-वकील की तरह आयुक्त किया था कि वो इस केस में न्यायलय की सहायता करे। सुनील फर्नांडीस ने पाया कि गुलशन जिनकी उम्र 70 वर्ष से ज़्यादा है और खुद भी वकील है, को पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद विकलांग श्रेणी के रेल डिब्बे के ठन्डे फर्श पर बिठा कर भोपाल लाया गया था तथा उनके हाथो को भी ट्रेन की खिड़की से बाँध कर रखा गया था। सुनील ने बताया " न पानी दिया गया न ही खाना दिया गया , 70 वर्ष से अधिक उम्र की महिला को गर्म कपड़ो से भी वंचित रखकर मर्दो से खचाखच भरे हुए ट्रेन के डिब्बे में लाया गया जहां शौचालय की सुविधा भी नहीं मिल सकी थी । "
न्यायलय ने पाया था कि पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार करने में उच्च्तम न्यायलय द्वारा रचित 11 में से एक भी आवश्यकताओं का पालन नहीं किया और यह भी पाया कि यह धोखाधड़ी नहीं बल्कि आपसी विवाद का केस है। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया कि दोनों महिलाओ को मुआवज़ा दिया जाए। विविद हो 70 वर्षीय श्रीमती गुलशन को 17 दिन और श्रीमती रिनी जोहर को 21 दिन कारावास में रहना पड़ा था।
अदालत ने एडवोकेट सुनील फर्नांडीस को अपने मित्र-वकील की तरह आयुक्त किया था कि वो इस केस में न्यायलय की सहायता करे। सुनील फर्नांडीस ने पाया कि गुलशन जिनकी उम्र 70 वर्ष से ज़्यादा है और खुद भी वकील है, को पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद विकलांग श्रेणी के रेल डिब्बे के ठन्डे फर्श पर बिठा कर भोपाल लाया गया था तथा उनके हाथो को भी ट्रेन की खिड़की से बाँध कर रखा गया था। सुनील ने बताया " न पानी दिया गया न ही खाना दिया गया , 70 वर्ष से अधिक उम्र की महिला को गर्म कपड़ो से भी वंचित रखकर मर्दो से खचाखच भरे हुए ट्रेन के डिब्बे में लाया गया जहां शौचालय की सुविधा भी नहीं मिल सकी थी । "
न्यायलय ने पाया था कि पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार करने में उच्च्तम न्यायलय द्वारा रचित 11 में से एक भी आवश्यकताओं का पालन नहीं किया और यह भी पाया कि यह धोखाधड़ी नहीं बल्कि आपसी विवाद का केस है। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया कि दोनों महिलाओ को मुआवज़ा दिया जाए। विविद हो 70 वर्षीय श्रीमती गुलशन को 17 दिन और श्रीमती रिनी जोहर को 21 दिन कारावास में रहना पड़ा था।
अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि स्वाभिमान प्रत्येक नागरिक का बुनियादी अधिकार है और इस मामले में इसे पूरी तरह खतरे में डाला गया था जिसके इजाज़त कटाई नहीं दी जा सकती। केस का ठोस आधार न पाने पर कोर्ट ने पांच लाख मुआवजे का हुक्म सुनाया।
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स्पांसर पोस्ट
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