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    Sunday, 2 July 2017

    नयी किरण : आगरा के इस शानदार हैंगआउट कैफ़े को चलाती है एसिड हमले में बचीं लडकिया।


    ताज महल से महज़ 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह "शिरोज हैंगआउट" कैफ़े अपने खाने और हेंडीक्राफ्ट से आपके मन को मोह लेगा। स्थानीय और विदेशी आपको यहाँ बैठ चाय और कॉफी के साथ गपशप लगाते आसानी से दिख जायेंगे।
    शिरोज सीसीडी या स्टारबक्स की तरह नहीं बल्कि अपनी एक ख़ास वजह को लेकर अपनी तरह का अनुपम कैफ़े है, जो चीज़ इसको किसी भी बड़े दिग्गज कैफ़े से अलग बनाती है वो यह है कि इसका पूरा कार्यभार वो लडकिया संभालती है जिन पर कभी तेज़ाब से हमला हुआ था।

    यह कैफ़े दिल्ली की एक संस्था "स्टॉप एसिड अटैक", 2013 का एक इनिशिएटिव है। शिरोज हैंगआउट कैफ़े में आप न केवल चाय की चुस्की और नमकीन इत्यादि का आनंद ले सकते हो बल्कि यह पढ़ने की जगह है, कार्यकर्ताओ की वर्कशॉप है, एक सामुदायिक भवन है, एक ऐसी जगह है जहाँ आप अपने स्किल्स और हस्तकला का प्रदर्शन कर सकते है।
    यहाँ से आप इन लड़कियो द्वारा बनाई हस्तकलाए भी खरीद सकते है।

    इन लड़कियो ने खुद को एक दबी कुचली, असहाय और अबला नारी की छवि से न केवल बाहर निकाला है बल्कि तेज़ाब से खराब हुए चेहरे के साथ ही खुद को उद्द्यमी, इनोवेटर और मज़बूत इरादों वाली स्त्रीयों के रूप में स्थापित किया है।

    यहाँ काम करने वाली महिलाये अपने साथ हुए हादसे की कहानी किसी से छुपाती नहीं साथ ही में समाज के उस सत्य को भी बताती है जिसमे कैसे तेज़ाब पड़ने के बाद इनके अपनों ही ने इनको छोड़ दिया था। इन्होंने यह साबित किया कि वो दिन गए कि एसिड हमला होने के बाद इस बात से निराश हुआ जाए कि ज़िन्दगी में अब कुछ नहीं बचा।इन लड़कियो ने खुद को और अपने जैसी कई लड़कियो को एक नई राह दिखाई है।


    तो अब अगली बार आप आगरा जाए तो इन बहादुर लड़कियो के "शिरोज हैंगआउट" कैफ़े में सिंगापुरी नूडल और ग्रिल्ड चीज़ अवश्य चख कर देखे

    दुःख, दर्द और यातनाये सहकर भी जिंदगी को सलाम करने वाली ऐसे लड़कियो को हिंदी उस्ताद सलाम करता है। कृपया इस अदभुद कैफ़े को मशहूर बनाने हेतु इस आर्टिकल को सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक शेयर करें।

    यदि पुलिस ने की फ़र्ज़ी गिरफ्तारी तो दावा ठोकिये ,मिल सकता है मुआवज़ा
    गज़ब : यह व्यक्ति पिछले 20 सालों से घर पर ही ऊगा रहा है पानी 
    मिसाल : मिलिये 68 वर्षीय चाचा से, वर्दी और बस्ता लेकर बच्चों की तरह जाते है स्कूल
    10 करोड़ की उधारी और 45 कचहरी मुक़दमे भी इनको सफल उद्यमी बनने से रोक न सके 

    स्पांसर पोस्ट 



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