कादिरी बाबा उर्फ़ बिरयानी बाबा, 79 वर्ष के यह वृद्ध आंध्र प्रदेश की चीमालापाडु दरगाह में लोगो को मटन और चिकेन बिरयानी खिलाते है और शाकाहारी लोगो को भी अन्य शाकाहारी व्यंजन खिला कर उदास नहीं होने देते।
तकरीबन हज़ारो की संख्या में और कभी कभी किसी ख़ास समारोह में दस हज़ार से भी ज़्यादा लोग यहाँ बिरयानी खाने आते है। इनकी इसी बिरयानी खिलाने की अदा पर फ़िदा होकर लोग प्यार से इनको "बिरयानी बाबा" पुकारते है।
2 टन बासमती चावल , सैकड़ो किलो मुर्गे और मटन के साथ देशी घी में बनी बिरयानी रोज़ बनती है और रोज़ खाने वाले लोग इसे समाप्त कर देते है। बिरयानी बाबा असल में अपने गुरु खादर बाबा के सिलसिले को आगे बढ़ा रहे है।
इतनी बड़ी मात्रा में खाना पकाना तथा उसको खिलाना, बेशक यह एक कठिन कार्य है और इसमें बाबा की मदद उनके अनुयायी दान या शारीरिक श्रम के रूप मे करते है।
बाबा के एक भक्त वाई सुरेश कहते है कि वो यहाँ पिछले 10 साल से आकर बाबा कि मदद करते है। बाबा प्रतिदिन भूखे और निर्धन लोगो को पूरी श्रद्धा से खाना खिलाते है।
अनुमान के मुताबिक बाबा अब तक 1 करोड़ से अधिक लोगो को खाना खिला चुके है।
यह है हमारा भारत यहाँ प्रेम सदैव नफरत पर भारी पड़ा है। यदि ऐसे उदाहरणों से हम कुछ न सीखें तो कब और किस से सीखेंगे।
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