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    Sunday, 2 July 2017

    मिसाल : मिलिये 68 वर्षीय चाचा से, वर्दी और बस्ता लेकर बच्चों की तरह जाते है स्कूल


    मिलिय 68 वर्षीय दुर्गा कामी से, जो अपनी बीवी और बच्चों के साथ रहते थे। किसी भी सामान्य व्यक्ति की भांति इन्होंने भी रिटायरमेंट में बाद चैन से जीने का स्वपन पाला था पर एक दिन इनकी बीवी का निधन हो गया और इनके बालक भी अपनी जिंदगी जीने के लिये इनको अकेला छोड़ गए।

    नेपाल में काठमांडू से 250 किलोमीटर दूर स्यांग्जा जिले में दुर्गा अकेले एक कमरे के घर में रहते है , यह अकेलापन इनको कटोचता था और इनको चाहिए थी एक सांत्वना जो आखिरकार घर से बाहर इन्होंने ढूंढ ही ली।

    दुर्गा ने अपने अकेलेपन से लड़ने के लिए जो जगह तलाशी वह थी श्री कलाभाईरब स्कूल की कक्षा, जहा वो हफ्ते के 6 दिन जाते है और विद्यालय के 200 बच्चों में से वो भी एक बच्चे ....मेरा मतलब बुज़ुर्ग ...छात्र है।

    दुर्गा के 6 बालक और 8 पोते पोतियां है पर विद्यालय जाना इनके लिए सबसे ज़्यादा प्रतिष्ठा की बात है, जिस विद्यालय को बचपन में उन्होने गरीबी के कारण छोड़ दिया था।

    दुर्गा ने पहले कहारे प्राइमरी विद्यालय में पांचवी तक की पढ़ाई की उसके बाद एक शिक्षक डॉ कोइराला के कहने पर आगे कई पढाई चालू की। कामी को विद्यालय की ओर से स्टेशनरी और वर्दी भी मिली है इसी के साथ नाश्ता भी मिलता है।

    दुर्गा की कक्षा के 20 बच्चे शुरू में बिलकुल भी आरामदायक और सामान्य महसूस नहीं करते थे। उनका एक सहपाठी सागर थापा कहता है कि :" पहले मैं सोचता था कि यह वृद्ध क्यों हमारे साथ पढ़ने आते है?" पर समय के साथ साथ सभी बच्चे सामान्य हो गए जो न केवल दुर्गा के साथ पढ़ते है बल्कि वॉली बॉल भी खेलते है।

    अब दुर्गा 10वी कक्षा में है और बच्चे उनकी मदद मुश्किल सवालो को हल करने में भी करते है। दुर्गा इस बात को पूरी तरह सत्यार्थ करते है कि उम्र मात्र संख्याये है और शिक्षा हासिल करने की कोई तय उम्र नहीं है। दुर्गा कामी कहते है जब बच्चे यह देखते है कि मुझ जैसे सफ़ेद बालो वाला बुज़ुर्ग पढ़ सकता है तो वो भी प्रेरित हो उठते है।

    maujbox.com दुर्गा कामी की सराहना करता है कि इस उम्र में वो सभी के लिए एक प्रेरणा सोत्र बने।

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