प्रकृति के चक्र में हमे सब कुछ मिल सकता है बशर्ते कि प्रकृति से छेड़छाड़ न करके एक सिस्टम के तहत अपनी जीवन से जुडी सभी मूलभूत सुविधाओं को बटोर लिया जाए। इस लेख को पढ़ने वालो में से शायद ही कोई ऐसा होगा जो पानी के लिए सरकार या पूंजीवादी कम्पनियो पर निर्भर नहीं है। शहरो की बात करे तो हम पूरी तरह किसी न किसी वाटर कनेक्शन पर आश्रित है पर आपको यकीन नहीं होगा कि ऐसा भी एक व्यक्ति है जो पिछले 20 वर्षो से "अपना पानी स्वयं उगा रहा है"
| सौरभ |
"पानी उगा रहा है " यह वाक़्य भी आपमें से बहुतो ने पहली बार ही सुना होगा , चलिए बताते है कैसे यह व्यक्ति पानी उगा रहा है और आप भी अपना पानी उगा सकते है।
बंगलुरु के रहने वाले ए.आर शिव कुमार के घर पिछले 20 वर्षो से जल कनेक्शन नहीं लगा है और यह पूरी तरह बारिश से पानी प्राप्त करते है जिसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कहते है और यही से उगता है पानी।
| पानी की टंकी व् फ़िल्टर |
शिव कुमार को "रेन कैचर" के नाम से भी जाना जाता है और यह इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस में रेन वाटर हार्वेस्टिंग एक्सपर्ट है। इनका घर इनके सपनो का घर है जिसे इन्होने सौरभ नाम दिया है।
शिव कुमार ने वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के डाटा के आधार पर पाया कि औसतन 4 सदस्य वाले परिवार की प्रतिदिन पानी की ज़रुरत 500 लीटर है। इस आंकड़े को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने घर का निर्माण किया। उनका घर प्रति वर्ष कम से कम 2 लाख लीटर पानी बारिश से प्राप्त करता है और उनका वार्षिक उपयोग लगभग 1 लाख 80 हज़ार लीटर है यानि जितना पानी उनके घर में इस्तेमाल होता है उससे ज़्यादा पानी प्राप्त किया जाता है।
| छत में बरसे पानी को टंकी में भेजा जाता है |
| फोटो : The Quint |
शिव कुमार कपडे और बर्तन धोने वाले पानी को वापस जमा करके उसका इस्तेमाल टॉयलेट में फ्लश के रूप करते है।पीने के पानी की अंतराल में जांच भी की जाती है और देखा जाता है कि पानी पीने योग्य है या नहीं। शिव कुमार कहते है हमे पूरे वर्ष साफ़ और शुद्ध पानी उपलब्ध है। शिव कुमार अपने घर में खुद की सब्ज़िया भी उगाते है। घर में हरियाली होने के कारण घर ठंडा रहता है और घर में पंखे भी नहीं है। शिव हँसते हुए कहते है सबसे बढ़िया यह है कि मुझे जीवित रहने लिए कम खर्चना पड़ता है। शिव कुमार ने अपनी छत पर चौकोर आकार भी बनाये है जिससे दिन में वो बजाये बिजली के सूर्य की रौशनी पर निर्भर रहते है।
सच में कुमार ने कई समस्याओं पर अपनी सूझबूझ से काबू पा लिया है। यदि राज्य सरकार अपने अपने राज्यों को अपने घर की तरह समझे और यही सिस्टम लागू करदे तो कोई इंसान प्यास से नहीं मरेगा। ताज्जुब इस बात पर है कि कम से कम कर्णाटक सरकार को यह काम 10 साल पहले कर ही लेना चाहिए था।
| सूर्या प्रकाश से उज्जवल होता घर |
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सोर्स
| रेन वाटर हार्वेस्टिंग का आसान उदाहरण |
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स्पांसर पोस्ट
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