भारत की शिक्षा पद्धति में कुछ बदलाव का ज़िक्र अक्सर होता आया है। हालांकि सभी बच्चो को मूलभूत समान शिक्षा देना न केवल उनका अधिकार है बल्कि यही शिक्षा उनको आगे चलकर देश की सम्पत्ति बनने में सहायक होती है।
लेकिन इसमें एक छोटी सी चूक हो गयी जब ICSE की कक्षा 6 की विज्ञान की पुस्तक लोगो की नज़र में आयी जिसमे एक मस्जिद जैसे दिखने वाले ढांचे को ध्वनि प्रदूषण का कारण बताया गया।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ , पूर्व में भी खबरे आती रही है कि पुस्तकों में गलत वर्णनो को दर्शाया गया है जैसे दहेज़ का कारण काला रंग है या चोरी के पीछे केवल अशिक्षित लोग होते है या काली महिला बदसूरत है और गोरी तथा ब्लॉन्ड महिला सुन्दर है। जब किताब छापने वाले ही ऐसी मानसिकता से ग्रस्त हो तो वह देश को किस तरफ ले जायेंगे, यह बताने की आवश्यकता नहीं। सोशल मिडिया पर लोगो ने जम कर रोष व्यक्त किया6th Std ICSE textbook shows causes of Noise Pollution with d MOSQUE. WT does it mean? AZAAN causes NOISE POLLUTION? #NarendraModi #PMO #HRD pic.twitter.com/eQP19n7Ik6— Zulqarnain Bhaisaheb (@zulqarnainrhs) July 2, 2017
The #Selina Publishers should be banned from supplying books to school. #ICSE act on it. This is spreading hatred and nuisance.@PMOIndia pic.twitter.com/IsdBWShzrs— Faisal Khan (@fmkhan44) July 2, 2017
As someone who studied in ICSE school & thought board's textbooks were cut above rest, this from Selina Publishers is pretty crappy: pic.twitter.com/1f7A8P27U8— Rezaul Hasan Laskar (@Rezhasan) July 3, 2017
इसके साथ ही मसूद पाशा नामक व्यक्ति ने ऑनलाइन पेटिशन डाली है जिसमे कहा गया है कि मस्जिद जैसे दिखने वाले ढांचे की तस्वीर का ध्वनि प्रदर्शन करता हुआ वर्णन हटाया जाए।
जब मामले ने तूल पकड़ा तो प्रकाशक सामने आया और माफ़ी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात की
प्रकाशक ने कहा :We do apologise if it hurt the sentiments of anyone;We will be changing the picture : SELINA PUBLISHERS pic.twitter.com/6vQRn1wu25— Mohamed Shibli (@ShibliOfficial) June 30, 2017
"कक्षा ६ की समाकलित विज्ञान की किताब के पन्ने संख्या 202 पर जो ढांचा है वह एक किले का है और शोर शहर से आता हुआ दिखाया गया है। हम माफ़ी मांगते है यदि किसी किसी की भावना को ठेस पहुंची हो। सूचित किया जाता है कि अगले प्रकाशन में इसे हटा लिया जायेगा"
आशा करते है कि निकट भविष्य में कोई किसी धर्म विशेष के चिन्हो का गलत वर्णन न करे।
सोर्स
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