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    Sunday, 2 July 2017

    सलाम : अपनी जान दांव पर लगाकर इस व्यक्ति ने बचाई थी 300 बर्मा मुस्लिम की ज़िन्दगी


    बर्मा के शरणार्थियो की देख रेख के लिये इंडोनेशिया की यात्रा में निकले ब्रिटेन की समाज सेवी संस्था लोनली ऑर्फन्स के सयेद इखलास की मुलाकात हुई एक ऐसे नायक से जिसने 300 से ज़्यादा बर्मा के शरणर्थियों को बचाया था।

    सयेद ने इलम्फीड को बताया इस रियल लाइफ हीरो का नाम यूसुफ़ है। यूसुफ़ एक गरीब मगर परिश्रमी मछुआरे है, जो लंगसा, इंडोनेशिया में रहते है। बर्मा में सरकारी शह पर रोहिंग्या मुस्लिम के नरसंहार के समय यूसुफ़ को 300 लोगो से लदी एक नाव बीच समुद्र में, किनारे से 7 घण्टे की दूरी पर भटकती हुई मिली। यह लोग अपनी जान बचाने बर्मा से भाग कर इस नाव के माध्यम से खुद को सुरक्षित जगह ले जा रहे थे। यूसुफ़ ने इंडोनेशिया ऑथोरिटी को रेडियो पर संपर्क किया परंतु वो किसी का इंतज़ार करने के इरादे में नहीं थे। यूसुफ़ ने खुद मदद करने का निर्णय लिया परंतु समस्या यह थी कि एक समय में यूसुफ़ की नाव पर केवल 48 लोग ही समा सकते थे। यह जानते हुए कि 300 लोग जीवित रहने की आशा में अचानक उनकी नाव पर चढ़ कर सबको डूबा सकते है, फिर भी इस शेर दिल व्यक्ति ने मदद से अपने हाथ नहीं खींचे और जान की बाज़ी लगाकर मैदान में कूद पड़ा।
    महानायक यूसुफ़ भाई

    यूसुफ़ ने लोगो के जत्थे को बिठाना शुरू किया और हर 14 घण्टे बाद वापस आकर दुसरे जत्थे को बिठाया इस तरह 7 चक्कर लगा कर यूसुफ़ में सभी 300 लोगो की जान बचाई।

    यूसुफ़ ने सयेद को बताया  :" पानी में बहुत से लोगो को मैंने फंसा हुआ पाया। मैंने प्रशासन को सूचना दी और खुद 7 चक्कर लगा कर इन लोगो को बचाया।"

    सयेद ने जब पूछा कि आपने यह ज़िम्मा खुद पर क्यों लिया तो यूसुफ़ ने जवाब दिया :" मुझे उनकी सहायता करनी ही थी क्योकि यहाँ समुद्र का नियम है कि प्रत्येक व्यक्ति जो किसी को बचा सकता है, बचाये। बिना किसी भेदभाव के।"
    सयेद इखलास के साथ यूसुफ़

     यूसुफ़ के इस कृत्य ने एक बार फिर इंसानियत को सत्यार्थ किया है। यहाँ मैं आपको बचपन में विद्यालय में पढ़ी एक कहानी याद कराता हूँ जिसमे गौतम बुद्ध एक हँस को बचाते है जिसको एक राजकुमार ने तीर मार कर जख्मी किया होता है। तब दोनों में विवाद होता है कि हँस किसके पास जाए तब हँस ही पर फैसला छोड़ा जाता है कि वो खुद किसके पास जाए, तब हंस गौतम बुद्ध की तरफ जाता है और गौतम बुद्ध जो कहते है वो यूसुफ़ पर बिलकुल सटीक बैठा है, गौतम बुद्ध ने कहा था।

    "मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है"

    मॉजबॉक्स हज़रत यूसुफ़ को सलाम करता है

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    स्पांसर पोस्ट 

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