• Breaking News

    Saturday, 1 July 2017

    काँच जैसे नाज़ुक, 18 वर्षीय अन्तर्राष्ट्रीय तैराक मोईन जुनैदी की कहानी प्रेरणा से भर देगी आपको


    18 वर्षीय मोईन जुनैदी का संबंध कर्णाटक के बेलगाम से है। उसका सपना भारत को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक दिलाने का है। मोईन जब ट्रेनिंग नहीं करता तब वो कविता लिखता और कंप्यूटर पर गेम खेलता है। शारीरिक तौर से मोईन आम लड़को जैसा नहीं है। मोईन ब्रिटल बोन डिसीज़ नामक बिमारी से जूझ रहा है जिसका मतलब यह है कि उसकी हड्डिया इतनी कमज़ोर है कि मामूली झटके से टूट जाती है।

    जन्म के 9 महीने बाद जब मोईन हाथ और पैरो के बल चलने लगा तब उसकी माँ को क्रैक जैसी आवाज़े आने लगी। उसके अभिभावको ने उसकी शारीरिक संरचना में भी मोड़ देखने शुरू किये। डॉ को दिखाया तो पता चला इस बिमारी का कोई इलाज नहीं है।

    बेटा यदि ऐसी अवस्था में हो तो किसी भी माँ बाप के लिए यह गम्भीर और दर्दनाक परिस्तिथि है लेकिन मोईन के परिजनों ने हिम्मत नहीं हारी और अगले 9 साल तक हर सम्भव इलाज कराया इस उम्मीद में कि शायद उनका बेटा स्वस्थ हो जाए। दोनों ने अपनी सारी जमा पूँजी लगा दी। बीमारी की वजह से मोईन को 300 से ज़्यादा फ्रैक्चर का सामना करना पड़ा, उसकी पूरी शारीरिक बढ़त रुक गयी जिसके कारण वो मात्र 18 इंच ही बढ़ पाया और दोनों टांगे जुड़ गयी। मोईन का कुल वज़न केवल 18 किलो है।

    लगभग हर स्कूल ने एक विकलांग को दाखिला देने में अनिच्छा दिखाई, इस लिए माँ कौसर बानो ने मोईन को घर पर ही पढ़ाया। मोईन कि माँ कहती है: " मैंने कभी इसे घर पर अकेला नहीं छोड़ा, हम किसी कांच से बनी वस्तु की तरह इसका ख्याल रखते है। यह इतना नाज़ुक है कि इसे गोद में लेने या गले लगाने में भी डर लगता है।"

    एक बार शहर के मशहूर तैराक गुरु उमेश कलघटगि से मोईन के माँ बाप की इत्तेफ़ाकन मुलाकात हुई। कलघटगि ने नन्हे मोईन में एक तैराक को भांप लिया और मोईन को ट्रेनिंग देने के लिए अपने फैसले पर अटल हो गए। कलघटगि ने उलझन के इस माहौल में मोईन के माँ बाप को राज़ी कर लिया तब से मोईन एक तैराक के रूप में प्रशिक्षण लेने लगा।

    मोईन ने अपने गुरु की दूरदर्शिता और परख को सही साबित करते हुए तैराकी की कई प्रतिस्पर्धाओं को जीता। 2013 में हुए "इंटरनेशनल व्हीलचेयर एंड ऐम्प्युटी सपोर्ट वर्ल्ड जूनियर गेम्स", पोर्टो रिको में मोईन ने स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला और यूनाइटेड किंगडम में होने वाले प्रतियोगिता में बैक्सट्रोक स्विमिंग में चौथा स्थान प्राप्त किया।

    मोईन जुनैदी का लक्ष्य अब पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का है। यह नन्हा सा खिलाड़ी अपने "कभी ना मत कहो" वाले अट्टीट्यूड से कहता है " इंसान को कभी हार न मानना सीखना चाहिए, इससे फर्क नहीं पड़ता कि हालात क्या है। मुझे कभी नहीं लगा कि मैं विकलांग या किसी से काम हूँ। मुझे तैराकी अच्छी लगती है और मैं दुनिया का बेहतरीन तैराक बनना चाहता हूँ।"

    मोईन जुनैदी हम सबके लिए एक प्रेरणा है। हम में से अधिकतर लोग मोईन जैसे नहीं है पर मोईन हम जैसे लोगो से काफी आगे निकल चुका है। एक तरफ जहा हम विपरीत परिस्थितियों और सुविधाओ के अभाव का हवाला देकर अपनी हार को आत्मसात करते है वही मोईन जैसे लोग किसी भी परिस्थिति को अपने हिसाब से बना कर हीरो बन जाते है।

    अपने लाखो पाठको की ओर से मॉजबॉक्स मोईन के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है

    यह भी देखिये
    अब अमेरिका में बेघरों को मुफ्त खाना खिलाते है गरीबी का दंश झेल चुके  क़ाज़ी मन्नान 
    चीन की हिमाकत , सिक्किम के क्षेत्र को बताया अपना
    गुलबर्ग नरसंहार में मामले में दोषी करार विहिप नेता अतुल वैद्य को जमानत मिली 
    झारखण्ड में गौ रक्षको ने एक मुस्लिम बुज़ुर्ग को बुरी तरह पीटा, 50 पुलिसवाले भी घायल, घर को आग लगाईं 

    स्पांसर पोस्ट 



    No comments:

    Post a Comment

    '; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();

    Contact Maujbox Admin & Owner

    Name

    Email *

    Message *