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    Wednesday, 19 April 2017

    " योगी जी, नहीं है द्रौपदी के चीर हरण जैसा तीन तलाक " : मोहम्मद ज़ाहिद


    हाल ही में योगी जी ने कहा था कि तीन तलाक द्रौपदी के चीर हरण जैसा है।  इसपर कई लोगो ने अपनी प्रतिक्रिया दिया।  सोशल मिडिया पर एक्टिव, देश के लगभग हर मुद्दे पर लिखने वाले और योगी जी के प्रशंसक मोहम्मद ज़ाहिद साहब ने योगी जी की इस बात से विरोध जताते हुए चीर हरण और तीन तलाक की एक तुलना की जो इस प्रकार है।


    "FBP/17-50

    योगी जी के नाम खुला खत :-

    योगी जी मैं आपके पदभार ग्रहण करते समय से ही आपका प्रशंसक रहा हूँ , आपके अब तक लिए फैसलों का प्रशंसक रहा हूँ , यहाँ तक कि तमाम गालियाँ खाकर भी आपके चित्र को अपनी डीपी में लगाये हुए हूँ। इसके बाद भी यदि कुछ गलत है तो आपका ध्यान आपकी गलती पर आकर्षित तो कराऊँगा ही , मैं प्रशंसक हूँ भक्त नहीं।

    महाराज आपने कल कहा कि

    "तीन तलाक" द्रोपदी के चीर हरण जैसा है"

    योगी महाराज ? आपको या तो तीन तलाक के बारे में नहीं पता या चीर हरण के बारे में नहीं पता , क्युँकि पता होता तो आप जैसा ज़िम्मेदार और संत जैसा व्यक्ति यह गलती नहीं करता।

    आपको ध्यान दिलाना आवश्यक है कि चीर हरण क्या है और तलाक क्या है।

    द्रौपदी को अर्जुन ने स्वयंबर में जीता था , ध्यान दीजिए इस बात को , "स्वयंबर में जीता" था अर्थात द्रोपदी जीती गयीं थीं ना कि अर्जुन को उन्होंने पसंद किया था , कोई भी स्वयंबर जीतता उसे द्रोपदी मिल जातीं। फिर ध्यान दीजिए कि "द्रोपदी जीती गयीं थीं"।

    जीता अर्जुन ने था पर वह पत्नी पाचों भाई की थीं इसी कारण उनको "पांचाली" कहा गया , युधिष्ठिर , भीम , अर्जुन , नकुल और सहदेव , सभी उनके पति थे। सबका द्रोपदी पर बराबर हक था।

    दुर्योधन से जुए में जब पांडव अपना राजपाट और फिर सब कुछ हार गये तो उनके पास जुए में हारने के लिए कुछ नहीं था , महाराज युधिष्ठिर को धर्मराज कहा जाता है और उन्होंने भी जुआ खेला था , जुआ खेलना अधर्म होता है जिसे धर्मराज युधिष्ठिर ने खेला और सब कुछ हार गये।

    योगी जी ? युधिष्ठिर धर्मराज होकर जूआ खेलते रहे और अंत में अपने पाँचो भाई की पत्नी को जुए में बैठा दिया ।

    महाराज ? धर्मराज को अपनी और अपने सभी भाईयों की एक मात्र पत्नी के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। द्रोपदी सबकी पत्नी थीं , क्षमा करिए "धर्मपत्नी" थीं , ऐसी धर्म पत्नी को जुए में एक धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा बिठाना ?

    खैर , महाराज ? फिर धर्मराज अपने सभी परिवार की एकमात्र पत्नी "पांचाली" को भी हार गये । समझ रहे हैं ना आप ? एक द्रोपदी जिसे स्वयंबर में जीता गया था उसे जुए में हार दिया गया , जीता उनके तीसरे पति अर्जुन ने और हारे पहले पति धर्मराज युधिष्ठिर।

    पाँच पांडव एक से एक योद्धा थे महाराज , और क्या हुआ द्रोपदी के साथ ? दुस्सासन ने उन्हें जंघे पे बिठाने का उन सब पतियों के सामने प्रयास किया।

    किसी महिला को जंघे पर बिठाने का अर्थ आप नहीं समझते होंगे योगी जी , क्युँकि आप सन्यासी हैं , योगी हैं , पीठासीन हैं , और आप विवाहित भी नहीं। इसका अर्थ होता है उस महिला के साथ संभोग करने के पहले चरण की शुरुआत , "कामसूत्र" यही कहता है।

    द्रोपदी के साथ दुस्सासन के इस घृणित प्रयास के बाद भी सभी बलशाली पांडव चुपचाप वहाँ बैठे रहे , ठीक भी था , धर्मपत्नी को जुए में हार गये थे तो किस अधिकार से विरोध करते ?

    द्रोपदी तो अब दुर्योधन और कौरवों की संपत्ती थी , दुस्सासन कुछ भी करने का अधिकारी था , दरअसल धर्मराज ने जो अधर्म किया वह जुआ खेलकर किया और फिर पत्नी भी हार गये।

    द्रोपदी जीवट वाली नारी थी , शेरनी थी , पाँच पतियों की पत्नी अदम्य साहस और शक्ती वाली होनी भी चाहिए , द्रोपदी थी भी उसने सर झुकाए अपने पाचों पतियों के सामने अपने सम्मान और पवित्रता की रक्षा करने का प्रयास किया।

    परन्तु जहाँ सौ कौरव और पूरी राज्य व्यवस्था विरुद्ध हो वहाँ एक अकेली शक्तिशाली द्रोपदी भी क्या कर लेती ? जैसे मुसलमान आज कुछ नहीं कर पा रहा है।

    फिर कौरवों ने उन पतियों के सामने "द्रोपदी' को निर्वस्त्र करना चाहा , द्रोपदी अपने को नग्न होने से बचाने के लिए अपने पाचों पतियों के सामने गिड़गिड़ाती रही पर धर्मराज और उनके भाई एक अधर्म कार्य करके हारे अपनी पत्नी को नग्न होने से बचाने में धर्म के कारण ही असहाय थे , कि वह पत्नी हार चुके हैं।

    मैं होता ऐसी स्थिति में तो एक स्त्री के नग्न होने से रोकने को ही अपना सबसे पहला धर्म समझता महाराज , इससे बड़ा तो कोई धर्म ही नहीं , यह धर्मराज एन्ड ब्रदर्स नहीं समझ पाए।

    फिर चीरहरण होता गया और श्रीकृष्ण जी ने मौके पर आकर पांचाली को नग्न होने से बचाया।

    महाराज ? यह है चीरहरण , कहाँ आपने तीन तलाक से तुलना कर दी ? तीन तलाक में यह सब कहाँ होता है ? यह तो आपसी कटु और विष से भर गये वैवाहिक संबन्धों को समाप्त करने के लिए किया जाता है , कुछ दो चार लोग गलत प्रयोग भी करते होंगे तो उनको दंड मिलना चाहिए परन्तु आप तो इसे "चीरहरण" से ही तुलना कर गये , आप जैसा धर्म ज्ञानी महापुरुष ऐसी गलती कर गया ? हैरत हुई महाराज।

    मुस्लिम महिलाओं को कब्र से निकालकर बलात्कार की घोषणा के समय आपकी चुप्पीधारी उपस्थिति उस घोषणा के समर्थन को दिखाती है तो अब उन्हीं जीवित महिलाओं के लिए इतना चिन्तित मत होईए कि महाभारत के "चीरहरण" अध्याय को ही भूल जाईए।

    आगे से ध्यान रखिएगा , हम जैसे आपके प्रशंसक और समर्थकों से लोग इसी कारण सवाल भी पूछते हैं कि योगी जी ने यह क्या कह दिया ?

    दुविधाजनक स्थिति होती है महाराज।

    योगी जी आफ्टरआल आई स्टिल लव यू"

    मोहम्मद ज़ाहिद साहब से आप सीधा जुड़ने तथा फेसबुक पर इनका  पढ़ने के लिए आप यहाँ जा सकते है



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