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    Saturday, 1 April 2017

    दंगा नहीं, यह था सुनियोजित आतंकी हमला , लड़ाई करने वाले दोनों छात्र नहीं थे वाडावाली गाँव के



    Scroll की अंग्रेजी रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में जो दंगा हुआ वो दंगा नहीं असल में वो एक आतंकी घटना थी जिसमे 5000 आतंकियों ने 100-120 परिवार पर पेट्रोल, तलवार, बंदूकों से हमला किया। इस पूरे इलाके 700 पटेल परिवार, 350 मुस्लिम परिवार, 250 दरबार परिवार और अन्य देवीपूजक, रेबारी और प्रजा पति परिवार रहते थे। हुआ यह कि यहाँ की ग्राम पंचायत का चुनाव नहीं होता, एक सभा में बैठ कर लीडर चुन लिया जाता है ढाई साल तक सभी हिन्दू मुस्लिम भाइयो ने मिनिष पटेल को चुना फिर ढाई साल के कार्यकाल के बाद सबने मिलकर 25 मार्च को सलीम भाई चुना।



    इसी दिन 5000 लोगो ने आकर 100-120 मुस्लिम परिवारों पर धावा बोल दिया। जिसमे 2 लोग मारे गए और कई जख्मी हुए और घर तथा गाड़िया जला दी गयी मिडिया ने बताया कि 2 बच्चों की लड़ाई के कारण यह झगड़ा हुआ लेकिन जिस गाँव पर हमला हुआ उस गाँव से दोनों बच्चों का कोई ताल्लुक नहीं है।

    जांच करने वाली टीम ने पाया कि बताया गया कि यह लड़ाई दो लड़कों के कारण हुई जो नूतन विद्यालय के छात्र थे लेकिन मुस्लिम छात्र ताकोड़ी गाँव का था और ठाकुर छात्र सांसेर गाँव का था जबकि हमला 3 गाँव के 5000 आतंकियों द्वारा वाड़ावाली गाँव में हुआ।



    जांच कर्ताओं ने पाया कि जब दोनों लड़के वाड़ावाली गाँव के नहीं थे तो इसी गाँव पर हमला क्यों हुआ। जांच कर रहे अन्य व्यक्ति ने कहा कि चंद घण्टो में 3 गाँवों से 5000 लोगो को जमा करना नामुमकिन है। इतना पेट्रोल, केरोसिन और हथियार जमा करना भी मुश्किल है कि 100 परिवार वाले गाँव को जलाया जा सके।

    पीड़ितों ने 5000 हमलावरों में आये गाँव के ही एक बीजेपी कार्यकर्ता को और दुसरे गाँव के 2 लोगो की पहचान की है। पीड़ितों के अनुसार वह दोनों राज्य की रिज़र्व पुलिस का हिस्सा है और उन्होंने अपनी आँखों से उनको फायरिंग करते देखा है।


    पीड़ितों द्वारा पहचानने पर भी पुलिस ने उनके नाम ऍफ़ आई आर में नहीं लिखे। पुलिस ने अपनी ऍफ़ आई आर ठाकुर समुदाय के 31 लोग और मुस्लिम समुदाय के 14 लोगो के खिलाफ लिखी है। दर्जन भर लोगो को गिरफ्तार किया है।

    इमरान भाई जिनका घर जला दिया था वो अपनी जान बचाकर भागे अभी वह टेंट में रह रहे है उन्होंने बताया कि "पुलिस ने कोई मदद नहीं की चुप चाप तमाशा देखते रहे। जिस दिन हमला हुआ उस दिन गाँव के ज़्यादा लोग करीब ही दरगाह के मेले में गए थे जिसके कारण कम लोगो की मौत हुई"

    औरते और बच्चे बुरी तरह डरे हुए है। घर जलने से सबकुछ खत्म हो गया। आतंकियों ने सब कुछ लूट लिया। टैक्स लेने वाले प्रशासन के प्यादों के सामने सब कुछ होता रहा लेकिन अभी तक प्रशासन ने कोई रहत कार्य शुरू नहीं किया।

    इसी बीच दलित हिन्दू और कोली पटेल हिन्दू लोगो ने बचे हुए मुस्लिमो को खाना और छत प्रदान किया,अस्पताल लेकर गए और सेवा की।

    पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए स्क्रॉल की इस रिपोर्ट पर क्लिक करे

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