सावधान हो जाइये क्योकि "गरीब जैसा" दिखने पर आप गिरफ्तार हो सकते है। जी हां यह सच है और आपने सही पढ़ा। इधर आप गरीब जैसा दिखे नहीं कि उधर आप अंदर गए नही। ऐसा क्यों है इसके लिए आपको कुछ समझना पडेगा। आइये समझाते है।
भारत एक बड़ी जनसँख्या वाला देश है और इसकी आबादी का एक हिस्सा भीख मांग कर जीवनयापन करता है। यह भी सत्य है कि यहाँ भीख मांगने का धंधा संगठित है जो मानव तस्करी, प्रताड़ना और अपहरण जैसे अपराधों को जन्म देता है। लेकिन सवाल यह है कि भारत का कानून इस परेशानी से निबटने के लिए क्या कदम उठा रहा है ?

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के 20 राज्यो और 2 केंद्र शासित प्रदेशो में भीख माँगना अपराध है। भारत में भिखारियों को इतनी बड़ी संख्या देख कर ऐसा लगता नहीं लेकिन यह कानून वास्तव में मौजूद है।
न्याय के डाटा पर निर्भर हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि भीख मांगने को इंडियन कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर के द्वारा संज्ञेय अपराध माना गया है जिसका मतलब है कि यह अपराध कही हो रहा हो तो इसमें पुलिस को फ़ौरन हस्तक्षेप करने का अधिकार है। इतना ही नहीं पुलिस को पूरा अधिकार है कि शक होने पर पूछताछ तथा बिना किसी शिकायत या अदालती आदेश के सीधा गिरफ्तार कर सकती है। इसका मतलब यह है कि ज़्यादातर राज्यो ने अपने पुलिस महकमे को यह अधिकार दिया हुआ है कि वह हर उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते है जो उनको भिखारी जैसा लगे या भीख मांगता दिखे और यह सब बिना वारेंट के भी सम्भव है।

इस पर आखरी कील यह ठोक दी गयी कि भीख मांगना एक गैर ज़मानती अपराध है। यानी पुलिस को लगता है कि कोई गरीब आदमी भिखारी है तो अंदर कर सकती है और वह ज़मानत भी नहीं पा सकता अगर वास्तव में वह भिखारी नहीं है।
इसके आगे रिपोर्ट बताती है कि ज़्यादातर राज्यो में , असम और तमिलनाडु को छोड़ कर, किसी व्यक्ति को सार्वजानिक स्थानों पर मात्र इधर उधर भटकने पर भिखारी माना जा सकता है। यानी सीधी बात नो बकवास यह है कि
आप गरीब की तरह दिखे तो आप गिरफ्तार किये जा सकते हो।
इस तरह के कानून को कभी कभी पुलिस गलत तौर ज़्यादातर कबीलाई इलाको में बेघर लोगो के खिलाफ इस्तेमाल करती है।

कुछ एंटी बेग्गींग कानून तो पुलिस को यह अधिकार भी देते है कि उन लोगो को भी गिरफ्तार किया जाये जो किसी भीख के आरोप में गिरफ्तार हुए व्यक्ति पर आश्रित है यानी किसी घर के मुखिया को पुलिस ने भीख मांगने के आरोप में पकड़ लिया तो उसपर आश्रित सभी परिजन अंदर किये जा सकते है।

भीख को अपराधीकरण करने से मैं समझता हूँ सरकार ने पहले से दुःखी लोगो के लिए और परेशानी खड़ी कर दी है। किसी को भीख पर सज़ा देने के बजाये सरकार को चाहिए कि उसे आवश्यक कलाये सिखाये और रोज़गार के साधन मुहय्या कराये नहीं तो इस कानून का किसी पर दुरूपयोग हुआ तो वह जीते जी और दुःखी हो जाएगा
आप हिंदुस्तान टाइम्स में इसकी डिटेल रिपोर्ट पढ़ सकते है। इस कानून के बारे में आपकी क्या राय है हमे कमेंट बॉक्स में अवश्य बताये
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