जाकिर अली त्यागी नाम का यह लड़का गिरफ्तार किया जा चुका है। वजह जानने पर आप हैरान रह जाएंगे। पुलिस ने जाकिर पर 66A और धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया है लेकिन आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट 66A को रद्द कर चुका है और मात्र एक शहीद पुलिस अधिकारी को श्रद्धांजलि तथा सम्मान देने की नीयत से उनकी तस्वीर प्रोफाइल पिक पर लगाना ज़ाकिर को भारी पड़ गया और धारा 420 का केस बनाया गया ।
इस पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय के जाने माने वकील महेन्द्र दुबे ने अपनी जानकारी साझा की. अपनी फेसबुक वाल पर उन्होंने बताया कि आखिर कैसे ज़ाकिर अली त्यागी पर कोई केस नहीं बनता। उन्होंने साफ़ किया कि धारा 420 तब लगाईं जा सकती है जब इसमें पैसे या जायदाद का पहलु हो। श्री महेन्द्र डूबे जी इस गिरफ्तारी को असंवैधानिक और गलत बताया। उन्होंने कहा
" उत्तर प्रदेश के मुज्जफरनगर कोतवाली में अली जाकिर त्यागी के खिलाफ उनके द्वारा फेसबुक पर कथित तौर पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गंगा पर लिखे कुछ पोस्ट के आधार पर धारा 420 आईपीसी और 66 (66A?) आईटी एक्ट के अधीन अपराध दर्ज किया गया है। इस कथित अपराध में उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश जाने पर उनकी ओर से दाखिल जमानत अर्जी खारिज होना बताया जा रहा है और उन्हें जेल भेज दिया गया है!
बताया जा रहा है कि अली जाकिर के फ़ेसबूक एकाउंट पर पिछले कुछ दिनों से नजर रखी जा रही थी और उनके द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुंडे मवालियों के यूपी छोड़ देने के बयान के साथ उनके खुद के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या को जोड़ कर और उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के किसी कथित फैसले में गंगा को जीवित प्राणी बताने पर किया गया तंज, उनकी गिरफ्तारी की वजह बतायी जा रही है!
अली जाकिर त्यागी की तंज वाली दोनों पोस्ट मैंने पढ़ी है और अदालती प्रक्रिया और कानून की जितनी जानकारी मुझे है उसकी बिना पर मुझे ये कहने में तनिक भी संकोच नहीं है कि अली जाकिर के मामले में बताये जा रहे तथ्यों के आधार पर उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है और उनकी गिरफ्तारी केवल कानून का पुलिसिया दुरूपयोग है और यदि उनकी जमानत खारिज कर दी गयी है तो जमानत खारिज करने वाले मजिस्ट्रेट का न्यायिक विवेक भी अफ़सोस करने लायक है।
इंडियन पेनल कोड की धारा 420 अली जाकिर से सम्बंधित तथ्यों में लागू नहीं हो सकती है जो ये है.....
Section 420 IPC
Cheating and dishonestly inducing delivery of property.—Whoever cheats and thereby dishonestly induces the person deceived to deliver any property to any person, or to make, alter or destroy the whole or any part of a valuable security, or anything which is signed or sealed, and which is capable of being converted into a valuable security, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
यहां याद रखियेगा कि धारा 66A आईटी एक्ट अस्त्तिव में नहीं है इसलिये लगता है कि अली जाकिर के खिलाफ पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66A नहीं बल्कि धारा 66 लगायी होगी जो कि जमानतीय है अर्थात इस धारा के अधीन आरोपित किसी व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकती है और चूँकि धारा 420 आईपीसी गैर जमानतीय है इसलिये इस बात की पड़ताल होनी चाहिए कि अली जाकिर के मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उन्हें पुलिस इस गैर जमानतीय अपराध में आरोपित कर गिरफ्तार कर सकती है या नहीं! हॉलाकि तथ्यों को देखते हुये धारा 66 आईटी एक्ट का भी अपराध उनके खिलाफ नहीं ही बनता है। फिर भी 66 आईटी एक्ट भी साथ रख लेते है जो ये है....
Section 66 IT Act, 2000
Computer related offences. -If any person, dishonestly or fraudulently, does any act referred to in section 43, he shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to three years or with fine which may extend to five lakh rupees or with both.
धारा 420 आईपीसी के अपराध को छल या cheating कहा जाता है जिसकी कानूनी परिभाषा ये है.
415. IPC- Cheating.— Whoever, by deceiving any person, fraudulently or dishonestly induces the person so deceived to deliver any property to any person, or to consent that any person shall retain any property, or intentionally induces the person so deceived to do or omit to do anything which he would not do or omit if he were not so deceived, and which act or omission causes or is likely to cause damage or harm to that person in body, mind, reputation or property, is said to “cheat”.
सामान्य शब्दों में समझिये तो धारा 420 आईपीसी के अपराध, धारा 415 आईपीसी में दी गयी "छल" या cheating की परिभाषा और धारा 66 आईटी एक्ट में दो शब्द dishonesty और fraudulently बहुत महत्वपूर्ण है जिनका सामान्य मतलब बेईमानीपूर्वक और छलपूर्वक होता है। साथ ही इस अपराध का गठन करने के लिए बेईमानी या छल के किसी कृत्य में प्रॉपर्टी या किसी अन्य वेलुअबल सेक्यूरिटी का involve होना जरूरी है। बिना प्रापर्टी या वेलुयबल सेक्यूरिटी के cheating या छल का अपराध नहीं बन सकता है। अगर मैं आपको ये विश्वास दिला कर कि आज अमुक समय मैं आपको फला जगह पर मिलूंगा और आपको बुला कर मैं न आऊं तो एक अर्थ में यहां मेरा आपको बुला कर खुद न आना आपके साथ छल ही है मगर ये अपराध नहीं है! साथ ही कानून की व्याख्याओ, स्थापनाओं और आपराधिक कानून के सिद्धान्त ये कहते है कि कुछ विशेष अपराधों को छोड़ कर किसी भी अपराध के गठन के लिए "आपराधिक मनस्थिति" का होना जरूरी होता है तभी किसी व्यक्ति को किसी अपराध में आरोपित किया जा सकता है।
यहां अली जाकिर के मामले के तथ्यों से ये जाहिराना दिख रहा है कि उनकी फेसबुक पोस्ट में कोई अपराध करने या कोई अपराध बनने जैसा कुछ है ही नहीं। उस पर धारा 66 आईटी एक्ट और 420 आईपीसी की परिभाषा और इन अपराध के लिए जरूरी तत्वों को देखते हुये अली जाकिर के खिलाफ इन अपराधों का गठन होने की दूर दूर तक कोई सम्भावना नहीं है। मेरा मानना है कि पुलिस का बिना किसी अपराध के बनने और बिना किसी कानून सम्मत आधार के अली जाकिर को गिरफ्तार किया जाना उनको हासिल संवैधानिक अधिकारों का पुलिस द्वारा हनन है, जिसके लिए सम्बंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही होनी चाहिये।
अभी तात्कालिक तौर पर अली जाकिर के परिवार के साथ कोआर्डिनेट करके सबसे पहले सेशन कोर्ट से उनकी जमानत कराने की कोशिश की जानी चाहिए और अगर सफलता न मिले तो हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल कर उनकी जमानत कराने का प्रयास करना चाहिए! साथ ही उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त किये जाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 या सन्विधान के अनुच्छेद 226 के तहत पिटीशन दाखिल किया जाना चाहिए।
उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मेरा यह मत है कि अली जाकिर को इस तरह फर्जी मुकदमें में गिरफ्तार किया जाना पुलिसिया अत्याचार है, रूल आफ लॉ के खिलाफ है, अली जाकिर के संवैधानिक, विधिक और नागरिक अधिकारों का हनन है! मैं यूपी में नहीं रहता हूँ मगर अली जाकिर के साथ हूँ और साथ इसलिये नहीं हूँ कि वो मुसलमान है और उसे गिरफ्तार करने वाली पुलिस के प्रदेश मुखिया किसी ख़ास सम्प्रदाय के हितों के पैरोकार समझे जाते है बल्कि साथ इसलिये हूँ कि वो इस देश का नागरिक है और उसे गलत और फर्जी मुकदमें में बिना किसी आधार के गिरफ्तार किया है जिसका मैं विरोध करता हूँ और हमेशा करता रहूंगा।"
आप श्री महेंद्र दूबे जी का या लेख सीधा उनके फेसबुक वाल पर भी पढ़ सकते है तथा उनसे जुड़ सकते है।
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