
पानी की कमी से बचने के लिए तमिलनाडु के एक मंत्री ने सोचा क्यों न नदी को वाष्पीकरण से बचाने के लिए उसपर थर्माकोल की चादर डलवा दी जाए। इसी आईडिया पर काम करते हुए उन्होंने मदुरै में शनिवार को वैहई बांध के पानी पर चादर की तरह थर्माकोल फैला दिया.

लेकिन पूरी तैयारी का अभाव, कम अनुभव और बिना प्रयोग के किये गए इस काम का कोई नतीजा नहीं निकला और कुछ ही देर में हवाओं ने सरकार की इस योजना को किनारे लगा दिया। वैहई बांध की ऊंचाई 71 फीट है तथा इसके पानी का प्रयोग मदुरै,डिंडुगल और आंडीपट्टी में सिंचाई और पीने के पानी के लिए किया जाता है।

नदी में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा था जिसको लेकर प्रशासन चिंतित था तो यह योजना बनाई गयी कि थर्माकोल की शीट से पानी को ढक देंगे ताकि अधिक मात्रा में पानी भाप बनकर वायुमंडल में न चला जाये।

यह योजना लागू करते समय वहाँ जन कल्याण मंत्री और दो कलेक्टर मौजूद थे। देखते ही देखते हवाओ ने थर्माकोल को किनारे लगा दिया जिससे यह योजना बुरी तरह विफल हो गयी।

10 हज़ार वर्ग किलोमीटर के इस बांध की इस योजना के लिए 10 लाख रुपए आवंटित किए गए थे। वैसे इसका यदि पक्का इलाज करना है तो मेरे हिसाब से कुछ निवेश करके इसपर सोलर पैनल लगाए जा सकते है जिसके दो लाभ होंगे। पहला यह कि सूरज की धूप से बिजली बनेगी और दूसरा पानी का वाष्पीकरण रुक जाएगा।

इस योजना को बनाने वाले इंजीनीयर ने प्रोजेक्ट की नाकामी पर कोई भी टिप्पणी देने से मना कर दिया.
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