नारायण कृष्णन बेंगलुरु के ताज होटल में एक अवार्ड विजेता शेफ थे और स्विट्ज़रलैंड भेजे जाने के लिए चुने गए थे लेकिन 2002 में एक घटना ने उनकी ज़िन्दगी ही बदल ही , नारायण ने नौकरी छोड़ दी और स्विट्ज़रलैंड जाना त्याग दिया और यह निर्णय लिया कि अब वो सड़क पर रह रहे बेघर और बेसहारा लोगो को खाना खिलाएंगे
नारायण कृष्णन बताते है :
" मैंने देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति भूख के कारण अपना ही मल खा रहा था। मै फ़ौरन नज़दीकी होटल गया और इडली लेकर आया। इडली मैंने उस बूढ़े व्यक्ति को दिया और मेरा विश्वास कीजिये मैंने किसी को इतनी जल्दी जल्दी खाते नहीं देखा था। जैसे जैसे वो खा रहा था मेरी आँखों से आंसू बह रहे थे , वो आंसू ख़ुशी के थे "
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कृष्णन ने इसके बाद अपनी नौकरी छोड़ दी और लग गए गरीबो को खाना खिलाने में। 2003 में उन्होंने एक संस्था अक्षय ट्रस्ट की स्थापना कि जिसका काम था कि मदुरै शहर के बेसहारा लोगो को खाना खिलाया जाए।
देखे सी एन एन की विडियो
नारायण ने तीनो समय का खाना देने का इरादा किया। तकरीबन 425 लोगो को वह नाश्ता, दोपहर का खाना और रात्रिभोज देते है। केवल यही नहीं , नारायण इन गरीबो के बाल भी काटते है। नारायण को 2010 में सी एन एन ने 10 हीरोज़ में शामिल किया। नारायण पर 2012 में एक मूवी भी बनायी गयी जिसका नाम उस्ताद होटल है
आज अक्षय पत्र फाउंडेशन दुनिया का सबसे बड़ा मिड डे मील प्रोग्राम चला रहा है। यह प्रतिदिन भारत के 9 राज्यो के 19 अलग अलग स्थानों में 9000 सरकारी विद्यालयों के 13 लाख बच्चो को खाना मुहैया कराता है।
लाखो की नौकरी और देशवासियो के लिए विदेश छोड़ना ही सच्चा देशप्रेम है।
मॉजबॉक्स नारायण कृष्णन को सलाम करता है।
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