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    Sunday, 5 March 2017

    अफ़ग़ानिस्तान का यह गाँव है इतना बाहरी कि यहाँ के ग्रामीण तालिबान और अमेरिका को भी नहीं जानते


    आज के युद्ध और आतंकी हमलो के देश अफ़ग़ानिस्तान  में यह कल्पना करना थोड़ा मुश्किल है कि एक शांति पूर्वक जगह आखिर कहा मिलेगी।  इसी लिए यह यकीन करना भी मुश्किल है कि अफ़ग़ानिस्तान में एक ऐसा गाँव भी है जो पूरी तरह शान्ति से रह रहा है।

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     ऐसा इसलिए क्योकि वो इतना दूर है कि आज की दुनिया से बिलकुल विस्मनरण है।  इनको कोई अंदाज़ा ही नहीं है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन भी कर चुका है और फिलहाल अमेरिका का कब्जा है क्योकि ऐसी बाते इन्होंने सुनी ही नहीं

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    करीब 12000 की आबादी वाला यह गाँव वखान कॉरिडोर पर स्थित है।  यह समुद्री सतह से  4923 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यह वो पतली पट्टी है जिसके एक तरफ पाकिस्तान और दूसरी तरफ ताजिकिस्तान है।

    अफ़ग़ानिस्तान पर फिलहाल अमेरिका का कब्जा है जो उन्होंने तालिबान से लड़कर हासिल किया है।  फिलहाल तालिबान अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन यह गाँव इन सब से निश्चिन्त, दूर दराज़ में होने के कारण शांति से रह रहा है।



    यह उम्दा तस्वीरे फ्रेंच फोटोग्राफर एरिक लफ्फारग ने खींची है जिन्होंने यहाँ कि यात्रा की


    इन लोगो को वखि कहा जाता है और यह बेहद आम ज़िन्दगी जीते है।  इनके पास कोई टेक्नॉलॉजि या लक्ज़री नहीं है


    न तो इन लोगो को इनके देश के राजनीतिक माहौल के बारे में जानकारी है न ही किसी तरह के विकास के बारे में यह कुछ जानते है साथ ही इनको आधुनिक मनोरंजन के बारे में भी कुछ नहीं मालूम।  इनके बच्चो को सचिन, अंडरटेकर, मेस्सी या माइकल जैक्सन के बारे में कुछ नहीं पता



    अफगानिस्तान सरकार इनके गाँव में पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है।  यहाँ तक पहुचने के लिए आपको अफ़ग़ानिस्तान के सख्त मौसम का सामना करना पड़ सकता है इसी के साथ एक कच्ची सड़क पर गाडी दौड़ानी पड़ सकती है


    यह इलाका पामिर पहाड़ी श्रृंखला के अन्तर्गत आता है और यह लोग दावा करते है कि पिछले 2000 वर्षो से यह यहाँ रह रहे है


    यह लोग पालतू जानवरो के साथ रहते है।  इनके घर पत्थर लकड़ी और प्लास्टर से बने होते है  अलग तरह के दिखते है



    अफगानिस्तान सरकार यहाँ पर्यटन को बढ़ावा देकर महिलाओ द्वारा गाँव के आइटम जैसे कढ़ाई , रग , हेंडीक्राफ्ट , होजरी की दुकाने खुलवा कर इनको मुख्यधारा से जोड़ना चाहती है।


    लेकिन अभी तक सरकारी प्रयासों के बाद भी इस गांव में फोटोग्राफर एरिक ही पहले पर्यटक बनकर पहुचे है।



    आशा करते है एरिक की इस पहल से यहाँ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यह लोग विकास की धारा में शामिल होकर धारा रिफाइंड आयल में समोसा करारा खाएंगे

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