
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने 2007 अजमेर बम धमाको के 2 आतंकवादियो को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है।आरएसएस से सम्बन्ध रखने वाले देवेंदर गुप्ता और भावेश पटेल पर धारा 120 B ( आपराधिक साजिश ), 295-A ( धार्मिक भावना आहात करना या गतिविघि चलाना) के तहत सज़ा सुनाई गयी। आजीवन कारावास के साथ साथ पटेल पर 10,000 और 5,000 रुपए का जुर्माना भी ठोका
अजमेर बम धमाका 11 ऑक्टूबर 2007 के दिन सूफी संत मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, अजमेर राजस्थान में हुआ था। धमाका रमज़ान के महीने समय हुआ जब श्रद्धालु अफ्तार करने बैठे थे। 5000 श्रद्धालुओ के बीच हुए इस धमाके से 3 लोगो मृत्यु और 17 घायल हुए थे।
प्रारम्भ में शक सुई पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैबा की तरफ गयी लेकिन बाद में जांच में पाया गया कि इसके लिए हिंदुत्व संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ज़िम्मेदार है। 8 मार्च 2017 को NIA की अदालत ने सुनील जोशी ( जो मर चुके है ), देवेंदर गुप्ता और भावेश पटेल को दोषी माना और कल यह सज़ा सुनाई। इस केस में 13 लोगो को मुल्ज़िम बनाया था महीने के शुरुआत में प्रमुख आरोपी समझे जा रहे स्वामी असीमानंद को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया।
भावेश पटेल और देवेंद्र गुप्ता आरएसएस के प्रचारक रहे है। पटेल गुजरात और गुप्ता झारखण्ड से संघ कार्यकर्ता थे। किसी आतंक के केस में पहली बार आरएसएस के कार्यकर्ताओ को सज़ा हुई है। क्या इतनी बड़ी संख्या में संघ के कार्यकर्ताओ का पकडे जाना और बम धमाके में 3 का लिप्त पाना, संघ प्रतिबंधित करने लायक नहीं है ?
शायद नहीं है और वजह आप जानते है।
सोर्स
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