
यह पृथ्वी हम मानवो का घर है। हज़ारो वर्षो से हम यहाँ रहते आये है। अब तक विकसित विज्ञानं के तहत हमको यह पता चला है कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड में केवल पृथ्वी में ही जीवन है। इस पृथ्वी ने हमे मुफ्त ऑक्सीजन , खाना और पानी दिया लेकिन इंसान के लालच और अंधी औद्योगीकरण द्वारा पिछले 100 वर्षो में इसकी वह हालत जिसे देखने पर तरस आता है। नासा की वेबसाइट से ली गयी कुछ तस्वीरों में देखिये कि दुनिया वालो ने कैसी कैसी चोटें अपनी प्यारी धरती माँ को दी है।

अलास्का का पेडरसेन ग्लेशियर ग्रीष्म ऋतु 1917 - ग्रीष्म ऋतु 2005

अराल समुद्र , मध्य एशिया अगस्त 2000 - अगस्त 2014.

ऑरोविले झील , कैलिफोर्निया जुलाई 2010 - अगस्त 2016

कैरोल ग्लेशियर, अलास्का अगस्त 1906 - सितम्बर 2003

पॉवेल झील , एरिज़ोना और उटाह मार्च 1999 - मई 2014

बेयर ग्लेशियर , अलास्का जुलाई 1909 - अगस्त 2005

रोंडोनिया के जंगल , ब्राज़ील , 1975 - अगस्त 2009

मककार्टी ग्लेशियर ,अलास्का , जुलाई 1909 - अगस्त 2004

ग्रेट मैन मेड रिवर , लीबिया अप्रैल 1987 - अप्रैल 2010 . इस पूरी लिस्ट में यह पहली सकारात्मक तस्वीर है। लीबिया के शासक गद्दाफी ने तब इस महान इंजिनीयरिंग प्रोजेक्ट को चलाया था इसमें पाइप और कूंए द्वारा रेगिस्तान में खेती के लिए पानी मुहय्या कराया गया था।

कोरी कालिस ग्लेशियर , पेरू जुलाई 1978 - जुलाई 2011

मार चिकिता झील , अर्जेंटीना , जुलाई 1998 - सितम्बर 2011

मर ग्लेशियर , अलास्का अगस्त 1941 - अगस्त 2004

उरुग्वे जंगल मार्च 1975 - फ़रवरी 2009 . इस लिस्ट में दूसरी सकारात्मक तस्वीर यह है। उरुग्वे सरकार ने अपने जंगल इलाके को बढ़ा कर 45000 हेक्टेयर से 900000 हेक्टेयर कर दिया है
तो यह थी हमारी करतूत जो हमने इस दुनिया के साथ की। अब हमे यह सोचना है की हम आने वाली नस्लो के लिए कैसी दुनिया देना चाहते है। हर व्यक्ति इसमें योगदान कर सकता है बस कुछ भी फ़िज़ूल मत बहाइये। पानी , कागज़ , बिजली , तेल इत्यादि सबका उतना ही इस्तेमाल कीजिये जितनी ज़रुरत हो और घरो में पौधे अवश्य लगाए
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