जॉर्डन, मलेशिया, सऊदी अरब और ट्यूनीसिया में महिला अभियंता यानी female engineer अमेरिका से ज़्यादा आम है। इन देशो में इंजीनियरिंग के लिए महिला आवेदको का प्रतिशत 50 फीसद तक ज़्यादा है जो हमे अचंभित कर हमारी "लकीर के फ़कीर" वाली सोच को तोड़ती है क्योकि आम धारणा यही है कि मुस्लिम समाज महिलाओ की शिक्षा का विरोधी है। इस धारणा के लिए पश्चिमी मीडिया का धन्यवाद :)
ऐसा क्यों है इसके जवाब को तलाशने हेतु वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को 589200 डॉलर का ग्रांट जारी किया गया ताकि वो पता लगाए कि क्या कारण है जिससे इन मुस्लिम देशो में महिलाये इंजिनीरिंग की तरफ रूचि दिखा रही है।
दो वर्ष तक शोधकर्ताओं ने अध्धयन किया और इसको पूर्ण फाइनेंस किया नेशनल साइंस फाउंडेशन ने इस लक्ष्य के साथ ताकि उन कारणों का पता लगे जिनसे महिलाये इंजिनीरिंग से प्रभावित हो रही है।
इंजिनीरिंग प्रोफेसर नेहाल अबु लैल के अनुसार , इन मुस्लिम देशो द्वारा इस क्षेत्र में प्रदान, प्रोत्साहन और महिलाओ का उसके प्रति सुखद अनुभव ही महिला छात्राओ की रूचि इंजिनीरिंग की तरफ ले जारहा है
नेहाल अबु लैल वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी की तीन शोधकर्ताओं में से एक है साथ ही वह एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर वोइलैंड स्कूल ऑफ़ केमिकल इंजिनीरिंग एंड बायो इंजिनीरिंग , वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में कार्य करती है। अबु लैल ने अपनी शिक्षा जॉर्डन यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से प्राप्त की है। उनके सभी भाई बहन भी इंजिनीर है। वह कहती है :
"जोर्डन से सम्बन्ध रखने के कारण मैं इस डिसिप्लिन से प्रेम करती हूँऔर यही रूचि अपनी छात्राओ में भी बनाये रखना चाहती हूँ "
सऊदी अरब के मामले में यह शोध वाक़ई हैरान कर देने वाला है क्योकि सऊदी अरब में कुछ क्षेत्रो में महिलाओ को वह स्वतंत्रता प्राप्त नहीं है जो पुरुषो को है जैसे गाडी चलाना इत्यादि लेकिन शिक्षा की जहां बात है तो वहा पुरुषो से अधिक सुख सुविधाएं महिला छात्रों को दी जाती है
इसी शोध से जुडी अन्य शोधकर्ता जूली मेक कहती है
" अमेरिका में सरकार महिलाओ की रूचि इंजिनीरिंग के क्षेत्र में बढ़ाने के लिए तरह तरह के प्रोग्राम और कुर्रिकुलम में परिवर्तन कर बहुत ज़्यादा डॉलर खर्च कर रही है, फिर भी वैसी सफलता हाथ नहीं आरही "
जूली मेक इस कारण भी अचंभित है कि बिना किसी प्रत्यक्ष कैम्पैन के कैसे मुस्लिम देशो में महिलाओ की सहभागिता की दर इतनी ज़्यादा है। वह आगे कहती है
"मुस्लिम देशो में इंजिनीरिंग के क्षेत्र में महिलाओ की सहभागिता की दर अचंभित करने वाली है क्योकि यहाँ कोई प्रत्यक्ष STEM -फोकस्ड कैम्पैन भी नहीं है "
इस शोध का मकसद इस धारणा को भी तोडना था जिसके अन्तर्गत लोग सोचते है कि इंजिनीरिंग केवल पुरषो के लिए है और शायद यही इसका जवाब है कि - मुस्लिम देशो में इंजिनीरिंग किसी भी तरह "केवल पुरुषो" का रोग बिलकुल नहीं है
सोर्स
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