
आसाम के नागाओं ज़िले में 2 युवको को भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला। उनपर "आदरणीय भीड़तंत्र" का आरोप था कि उन्होंने गाय चुराई है और "जज भीड़ साहब" ने वही फैसला देते हुए दोनों की जान लेली।
पुलिस दोनों को अस्पताल ले गयी जहा उनको मृत घोषित कर दिया। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। आसाम में गाय के नाम पर होने वाली हत्याओं का यह पहला मामला है जबकि देशभर में कुरैशी, अख़लाक़ और पहलूखां समेत यह कोई दसवा या पन्द्रहवा मामला होगा।

उच्च अधिकारियो ने बताया कि दोनों मृतकों की उम्र 20 से 25 वर्ष थी जिनको भीड़ ने गाय - चोर कहकर बहुत बुरी तरह पीटा
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देबराज उपाध्याय ने बताया कि
" जब पुलिस मौके पर पहुंची तब ग्रामीण उन दोनों को कसमारी रिज़र्व के पास पीट रहे थे। पुलिस ने अति शीघ्र ही दोनों तो अस्पताल लेजाने की व्यवस्था की जहाँ वह दोनों अपनी चोटों से मर गए। भीड़ उन दोनों को लगभग डेढ़ किलोमीटर तक मारती रही। दोनों मृतकों की पहचान आसाम ही के नागाओं ज़िले के अबू हनीफा और रियाज़ुद्दीन अली के तौर पर हुई है और उनके परिजनों ने शिकायत दर्ज करा दी है।
सुप्रीटेंडेंट ऑफ़ पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा जताया है। ह्यूमन राइट वाच की रिपोर्ट बताती है कि जब से भारत में भाजपा ने सत्ता हासिल की है तब से मुस्लिम और दलित हिन्दुओ पर अत्याचार के मामले मात्र बीफ खाने की , खरीदने की और बेचने की अफवाहों के कारण बढे है। आसाम में भी भाजपा की सरकार है और इन सभी हत्याओं में अब तक सबसे कम उम्र झारखण्ड का एक 13 वर्षीय बच्चा है
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सोर्स
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