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    Thursday, 11 May 2017

    1857 संग्राम : इन 21 राजाओ ने दिया था अंग्रेज़ो का साथ [पार्ट -1 ]


    बचपन में आपने और मैंने पढ़ा था कि हम और 90 वर्ष पहले ही आज़ाद हो जाते यदि हमारा 1857 का विद्रोह सफल हो जाता। हमको बताया गया कि 1857 के विद्रोह में भारत बड़े बड़े राजा महाराजा और जमींदारों में एक स्वर में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोला परन्तुि नतीजा यह रहा कि हम उस विद्रोह में असफल हुआ जिसका खामियाजा हमे अगले 90 वर्षो तक ब्रिटिश राज का ग़ुलाम बनकर उठाना पड़ा। आपने कभी यह जानना चाहा कि आखिर क्या कारण था कि बहादुरशाह ज़फर , रानी लक्ष्मी बाई, तात्या तोपे और नाना साहिब पेशवा जैसे विजयी लोग इस युद्ध में मिलकर भी अकेले ब्रिटिशर्स को पराजित नहीं कर पाये। 

    यदि आप समझते है कि ब्रिटिशर्स अकेले थे तो यही आपकी इतिहास को लेकर सबसे बड़ी चूक है क्योकि हम बता रहे है आपको उन 21 स्वार्थी राजाओ के बारे में जिन्होंने अंग्रेज़ो के साथ मिलकर 2 वर्ष 2 महीने और 1 हफ्ते में इस संग्राम को ध्वस्त कर दिया 

    जहां एक तरफ थे ब्रिटिश फ़ौज के पूर्व फौजी, (जो भारत ही के थे और शुरू में अंग्रेज़ो के लिए काम करते थे पर बाद में विरोधी हो गए), मुग़ल, रानी लक्ष्मी बाई, बाबू कुंवर सिंह  बख्त खान तो वही दूसरी तरफ थे ब्रिटिश, नेपाल और यह 21 स्वार्थी राजा।
      




    1 अजयगढ़ स्टेट
    1765 में वजूद में आई अजयगढ़ स्टेट को बुंदेला राजपूत गुमान सिंह ने स्थापित किया था। गुमान सिंह जैतपुर स्टेट के राजा पहर सिंह का भतीजा था। 1809 में अंग्रेज़ो ने यहाँ के राजा को अपने अधीन कर लिया था। इसने 1857 के विद्रोह में अंग्रेज़ो का साथ दिया। 1 जनवरी 1950 को यह इंडिया लेलिया गया 


    2 . अलवर स्टेट
    अलवर स्टेट का पुराना नाम उलवर था। इसका नाम खानज़ादा के राजा अलावर खान पर रखा गया। अलावर खान चंद्रवंशी राजपूत नाहर खान का वंशज था जिन्होंने 13वि सदी में इस्लाम अपना लिया था। राजपूत नाहर खान का एक वंशज हसन खान मेवाती भी था जिसने बाबर से युद्ध किया था बाद में हसन खान के भतीजे ने मुघलो से सम्बन्ध बनाये। 18 मार्च 1948 को अलवर स्टेट इंडिया के अधीन ले ली गयी। जो आज राजस्थान में आती है। इस स्टेट ने भी अंग्रेज़ो ही का साथ दिया। 

    3. भरतपुर स्टेट

    1700  में जब मुग़ल सल्तनत कमज़ोर पढ़ने लगी तब सनसनी गाँव के ज़मींदार जाट बैजा ने अपना स्टेट बढ़ाना शुरू किया। बाद में उनके वंशज चुरामन सिंह और बदन सिंह ने 1724 में यह स्टेट बड़े पैमाने पर फैलाया। बाद में यह भी अंग्रेज़ो के अधीन हो गया और अंग्रेज़ो से अपनी वफादारी इसने 1857 के विद्रोह में दिखा दी।

    4. भोपाल स्टेट

    भोपाल स्टेट की नींव रखी  मुग़ल फ़ौज के एक अफ़ग़ान पश्तून फौजी दोस्त मोहम्मद खान ने।  आगे चलकर 1818 में यह अंग्रेज़ो के अधीन आगया और 1818 से 1947 तक यह अंग्रेज़ो की सुरक्षा में रहा। 1857 को भोपाल स्टेट के मौलवियों ने स्टेट की नीतियों के खिलाफ जाकर अंग्रेज़ो के खिलाफ जिहाद का फतवा देदिया और लगातार तात्या तोपे, टोंक के नवाब  और रानी लक्ष्मी बाई से संपर्क में रहे।  यह मौलवी घर घर में अपनी बात पहुंचाने के लिए चपाती पर सन्देश लिखने लगे। उस वक़्त की रानी सिकंदर जहां बेगम को जब पता लगा तो उन्होंने चपातियों के वितरण पर प्रतिबन्ध लगा दिया। मार्च 1948 में यह स्टेट भी इंडिया में ले लिया गया।

    5 बिजावर स्टेट

    गोंड जाति के एक मुखिया बिजय सिंह द्वारा इसकी नींव रखी गयी हालांकि इसके पहले राजा का नाम बीर सिंह  देव था। 1811 ,इ यह स्टेट अंग्रेज़ो के संरक्षण में चला गया। 1857 के विद्रोह में इसने अंग्रेज़ो का साथ दिया जिससे खुश होकर अंग्रेज़ो ने तत्कालीन राज को 11 तोपों की सलामी दी। 1950 में इसको इंडिया में मिला लिया गया।

    6.बीकानेर स्टेट
    बीकानेर स्टेट 1465 में राठौर राहघराने द्वारा वजूद में आई। 1818 में यह भी अंग्रेज़ो के अधीन चले गए और अंगरजो के संरक्षण से 1947 तक राज करते रहे। 7 अगस्त 1947 में यह स्टेट भारतीय यूनियन के अंदर समा लिया गया। इसने भी 1857 में अंग्रेजो का साथ दिया था।

    7. बूंदी स्टेट

    बूंदी स्टेट 1342 में स्थापित हुआ था। 10 फेब्रुअरी 1818 को यह भी ब्रिटिश के संरक्षण में चला गया। बूंदी स्टेट में आज़ादी के लगभग डेढ़ साल बाद खुद का विलय 7 अप्रेल 1949 में इंडिया यूनियन में करवाया

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