पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है क्योकि पत्रकारों का काम सरकार की आलोचना और सराहना के बीच एक तालमेल बिठाना होता है। एक पत्रकार सच्चाई से जनता को रूबरू कराता है और जनता की आवाज़ बनकर शासक वर्ग को कटघरे में लाकर सवाल करता है लेकिन आज ऐसा नहीं है। आज सच्ची पत्रकारिता सिमट गयी है। ऐसे ही एक सच्चे पत्रकार है विनोद दुआ।
विनोद दुआ ने यूट्यूब पर अब तक 50 एपिसोड्स प्रकाशित किये है जिनमे वह सरकार से उन मुद्दों पर सवाल पूछते है जो मेनस्ट्रीम मीडिया हर हफ्ते बगदादी की मौत की आड़ में छुपा देता है। यह सवाल आपसे सम्बंधित है। यदि आप चाहते है ऐसी पत्रकारिता बची रहे तो इस वीडियो को देखे और शेयर करे।
विनोद दुआ जी का यह 51 वा एडिसोड है। इसमें वह बता रहे है सहारनपुर के दंगे और विदेशो से आये चंदे पर राजनैतिक दलों की चालबाज़ियों के बारे में
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विनोद दुआ ने यूट्यूब पर अब तक 50 एपिसोड्स प्रकाशित किये है जिनमे वह सरकार से उन मुद्दों पर सवाल पूछते है जो मेनस्ट्रीम मीडिया हर हफ्ते बगदादी की मौत की आड़ में छुपा देता है। यह सवाल आपसे सम्बंधित है। यदि आप चाहते है ऐसी पत्रकारिता बची रहे तो इस वीडियो को देखे और शेयर करे।
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