मोहम्मद नवास के लिए रविवार का दिन एक आम दिन की तरह था। वो अलुवा, केरल की स्थानीय मस्जिद से नमाज़ पूरी करके निकले ही थे कि अचानक वह कुछ देख कर रुक गए। उन्होंने देखा कि मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में जनता खड़ी है।
यह जनता शिवगिरि स्कूल के सामने खड़ी थी क्योकि उनके बच्चे अंदर नीट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी एंड एंट्रेंस टेस्ट दे रहे थे। बाहर खड़ी जनता वो माँ बाप थे जो अपने बच्चो के साथ परीक्षा स्थल तक आये तथा बाहर इंतज़ार कर रहे थे।
मोहम्मद ने सोचा कि बाहर खड़े लोगो की परेशानी कम करने के लिए कुछ किया जाए।
मोहम्मद वादी हुदा ट्रस्ट के अध्यक्ष है, यही संस्था उसी मस्जिद की देखरेख करती है। अपने सहयोगियों को बुलाकर उन्होंने जल्दी से बाहर खड़े अभिभावकों को अंदर मस्जिद में बैठने का न्यौता दिया। वादी हुदा ट्रस्ट के साथ स्थानीय मुस्लिम भी अभिभावकों की सेवा करने मस्जिद आगये।
उन्होंने एक स्थानीय चाय की दुकान खुलवाई जो रविवार होने के कारण बंद थी और सबके लिए पानी, जूस और चाय का बंदोबस्त कराया। जब तक बच्चो की परीक्षा चलती रही सभी अभिभावकों ने मस्जिद में आराम से बैठकर समय व्यतीत किया।
इसकी जानकारी फेसबुक पर यूसुफ पुलप्पत्ता ने मलयालम भाषा में दी
आज के समय में जहा सांप्रदायिक विष चरम पर है ऐसे में केरला की इस स्थानीय मस्जिद ने सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।
सोर्स 1 और 2
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