
5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया काण्ड पर फांसी की सज़ा को बरकरार रखते हुए फैसला सुनाया। इसी महीने बिलकिस बानो के बलात्कारियो को भी आजीवन कारावास मिला लेकिन निर्भया काण्ड में फांसी हो या बिलकिस बानो काण्ड में आजीवन कारावास , यह दोनों ही मिलकर कोई सुधार नहीं ला पाए क्योकि इसके एक दिन बाद से अब तक 8 जघन्य बलात्कार हो चुके है। सरकार पूरी तरह बलात्कार को रोकने में विफल साबित हुई है।
15 मई 2017
- 22 वर्षीय सिक्किम की महिला के साथ चलती गाडी में गुरुग्राम में बलात्कार।
- रेप के बाद गाडी से फेंका
- महिला घर वापस आरही थी तीन लोगो ने खींचा था गाडी में
- जहा से उठाया वहा से 20 किलोमीटर दूर तक लेजाकर रेप किया
14 मई 2017
- रोहतक में 20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार
- बलात्कारी उसका मित्र था जिसको लड़की ने शादी के लिए मना किया था।
- चेहरे पर ईंट मार दी ताकि शक्ल बिगड़ जाए
- लड़की पर गाडी भी चढ़ाई
- लाश इस हालत में मिली कि कुत्ते खा रहे थे

13 मई 2017
- 12 वर्षीय बालिका हुई गर्भवती
- उसका सौतेला बाप करता था बलात्कार
- लड़की को मारा और प्रताड़ित किया जाता जिससे लड़की चुप रहती
11 मई 2017
- गाज़ियाबाद में एक 45 वर्षीय स्कूल मालिक अपनी ही बेटी से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार
- लड़की को मारता और पीटता था
- माँ को भी थी इस अपराध की जानकारी

10 मई 2017
- 21 महीने की बच्ची के साथ 40 वर्षीय पडोसी ने किया बलात्कार
- घटना दिल्ली के गांधीनगर की
- पडोसी बच्ची के पिता का दोस्त था और बच्ची के साथ खेलता था
- घटना वाले दिन बाप कही गया था
- बच्ची की हालत गंभीर
10 मई 2017
- 5 वर्ष की मूक- बधिर बच्ची के साथ बनारस में 24 वर्षीय युवक ने किया बलात्कार।
- पहले अपहरण किया फिर किया दुराचार
- मूक बधिर होने के कारण चिल्ला नहीं सकी
- अगले दिन खेत के एक नाले में खून से लथपत मिली

8 मई 2017
- लुधियाना की एक औरत ने अपने मित्रो से मिलकर अपनी ही बेटी का बलात्कार कराया
- 5 माह तक चला बलात्कार
- 3 माह का गर्भ ठहरा
- पीड़िता 16 साल की बालिका
6 मई 2017
- दिल्ली के आनंद पर्वत इलाके में 3 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार
- बलात्कारी 22 वर्षीय पडोसी
- बलात्कारी को पकड़ा रंगे हाथो
- बच्ची की नाजुक अंगो से बह रहा था खून
- सर्जरी के लिए लेडी हार्डिंग में भर्ती
उपरोक्त बलात्कार 5 मई के बाद देशभर में हुए है। ज़रा सोचिये कि समाज किस प्रकार निर्दयी, क्रूर और अत्याचारी हो गया है। क्या हो गया है इंसानो को जो 21 माह की बच्ची को भी नहीं छोड़ रहा है। सरकार महिलाओ पर हो रही इस हिंसा को लेकर पूरी तरह विफल है। मिडिया और पैनल डिबेट में ट्रिपल तलाक, हलाला और बीफ छाया हुआ है। आखिर इतने क्रूर कैसे हो गए हम ? क्या और किस तरीके से रोका जाए इस जघन्य अपराधों को
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