पिछले 2 भागो में आपने 14 राजाओ के बारे में पढ़ा कि कैसे उन्होंने 1857 के संग्राम में भारतीय गठबंधन छोड़, अंग्रेज़ो के साथ भारत को और 90 वर्ष गुलाम बनाने में अपना सहयोग दिया। हम और आप 90 वर्ष पहले आज़ाद हो जाते यदि इन 21 राजाओ ने साथ न छोड़ा होता।
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15 नाभा स्टेट
1809 में महाराजा रणजीत सिंह की ताक़त बढ़ रही थी तब नाभा स्टेट ईस्ट इंडिया कंपनी के संरक्षण में चला गया। 1857 को अंग्रेज़ो के प्रति इस स्टेट वफदारी दिखाई जिसके बाद इस स्टेट को भूमि का बड़ा हिस्सा अंग्रेज़ो द्वारा दिया गया। 1947 में यह स्टेट इंडियन यूनियन के अंदर शान्ति से आगया।
16. पटियाला स्टेट
40 साल की मराठा और अफ़ग़ान से चली जंग और ऊपर से महाराजा रणजीत सिंह से खतरा लिए पटियाला स्टेट के पास अंग्रेज़ो से भी लड़ने का दम नहीं बचा था। स्टेट ने 1808 अंग्रेज़ो से हाथ मिला लिया। बाद में 1947 को इसका विलय भारत में हुआ।
17 रामपुर स्टेट
इसकी स्थापना नवाब फैज़ुल्लाह खान ने कर्नल चैंपियन के साथ की थ फैज़ुल्लाह एक पशतून थे। वो मुग़ल दौर में भारत आगये थे। रामपुर अंग्रेज़ो का सहयोगी स्टेट बनकर रहा और अंग्रेज़ो के साथ मिलकर 1857 में ज़फर,तोपे, लक्ष्मीबाई और बख्त खान के खिलाफ लड़ा।अंग्रेज़ो के जाते ही इस स्टेट को इंडिया में ले लिया गया।
18. रेवा स्टेट
इसके राजा वाघेला राजपूत राजवंश से संबंध रखते थे। 1947 को यह इंडिया में समा लिया गया।
19. सिरमौर स्टेट
20. सिरोही स्टेट
21. उदयपुर स्टेट
उदयपुर स्टेट ने ब्रिटिशर्स की मदद दुसरे एंग्लो मराठा जंग में की। इसके बाद इन्होंने अंग्रेज़ो के अधीन जाने की अर्ज़ी 1805 में लगाईं जिसे अंग्रेज़ो ने तब मना कर दिया। 31 जनवरी 1818 को अंग्रेज़ो ने उदयपुर को अपने अधीन लेलिया। उदयपुर स्टेट से अंग्रेज़ो ने अपने राजनीतिक लाभ उठाये । इस स्टेट में भी 1857 को स्वतंत्रतता सेनानियो के खिलाफ जाकर अंग्रेज़ो की मदद की। इसके अंतिम राजा ने 7 अप्रैल 1949 को इंडीज़ में विलय देदिया।
अब तक आपने जितना पढ़ा, यह स्पष्ट हो गया होगा कि अंग्रेज़ो के आने से पहले तक यहाँ एक अथॉरिटी नहीं थी। सभी ने अपने अपने देश बाँट रखे। हर देश, स्टेट या राज्य में वही होता था जो राजा या नवाब चाहता था। अंग्रेज़ो से पहले का भारत आज के भारत जैसा नहीं था जहा आने के लिए पासपोर्ट या वीसा लगता था। यहाँ के सभी राजा आपस में लड़े, मरे, कटे। इतिहास को घुमा कर आपसे अक्सर झूठ बोला जाता रहा है कि मुग़ल या मुसलमान बाहर से आये थे और भारत के हिन्दुओ पर अत्याचार किये। यह बात कोरी बकवास है वो इसलिये क्योकि यहाँ हर राजा दूसरे के लिए बाहर ही का था। मराठा के लिए अवधी बाहर का था, सिरमौर के लिए उदयपुर बाहर था। यह भी बका जाता है कि मुसलमान गद्दार थे और भारतीय राजाओ पर अत्याचार किया लेकिन ऊपर आप देख चुके हो पेशवा और लक्ष्मीबाई के खिलाफ हिन्दू और मुस्लिम दोनों राजाओ ने अंग्रेजो का साथ दिया वही बख्त खान और ज़फर ने लक्ष्मीबाई और तोपे का साथ दिया।
100 करोड़ लोगो को साथ में लेकर चलना कठिन है पर 80 करोड़ लोगो को 16 करोड़ से भयभीत करके देश को धर्म और सम्प्रदाय में बांटकर शासन करना आसान है।
हिंदी उस्ताद की यह अपील है कि आप धर्म के आधार पर मत बटिए क्योकि असल मुद्दा यह है कि रोज़गार, उन्नति और स्वतंत्रता है या नहीं।
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