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    Thursday, 11 May 2017

    1857 संग्राम : इन 21 राजाओ ने दिया था अंग्रेज़ो का साथ [पार्ट -3]


    पिछले 2 भागो में आपने 14 राजाओ के बारे में पढ़ा कि कैसे उन्होंने 1857 के संग्राम में भारतीय गठबंधन छोड़, अंग्रेज़ो के साथ भारत को और 90 वर्ष गुलाम बनाने में अपना सहयोग दिया। हम और आप 90 वर्ष पहले आज़ाद हो जाते यदि इन 21 राजाओ ने साथ न छोड़ा होता।

    पिछले पोस्ट से आगे 
    15 नाभा स्टेट 

    इस स्टेट की स्थापना सिख कन्फेंड्रन्सी  समय 1763 में हुई। फुलकिया वज़ीरों को सिख कन्फेंड्रेन्सी के दौरान कई स्टेट मिले जिनमे से यह भी एक था और यह नाभा के वज़ीर हमीर सिंह को मिला।
    1809 में महाराजा रणजीत सिंह की ताक़त बढ़ रही थी तब नाभा स्टेट ईस्ट इंडिया कंपनी के संरक्षण में चला गया। 1857 को अंग्रेज़ो के प्रति इस स्टेट  वफदारी दिखाई जिसके बाद इस स्टेट को भूमि का बड़ा हिस्सा अंग्रेज़ो द्वारा दिया गया। 1947 में यह स्टेट इंडियन यूनियन के अंदर शान्ति से आगया।

    16. पटियाला स्टेट

    पटियाला स्टेट की नींव मुस्लिम कसाना और ब्रार सिख जाटो ने 1721 में रखी थी, हालांकि इससे पहले 1627 में इसके पटियाला  राजवंश के मोहन के पास केवल मेहराज नाम का गाँव था ।  मोहन के साथ भुल्लर और धालीवाल किसानों ने अन्याय किया , वो मोहन को बसने नहीं देते थे।  मोहन गुरु हरगोबिंद साहब का अनुयायी था  और उसने इस बात की शिकायत की।  नतीजे में भुल्लर और धालीवाल किसानो के साथ जंग हुई।  गुरु साहिब के सैनिकों ने भुल्लर और धालीवाल को परस्त कर दिया और मेहराज गाँव मोहन को मिल गया। 1631 में मेहराज की लड़ाई में इस स्टेट ने मुग़लो के खिलाफ गुरु हरगोबिंद का  साहिब का साथ दिया था।  पटियाला स्टेट ने अंग्रेज़ो का साथ एंग्लो नेपाल युद्ध के साथ साथ एंग्लो सिख युद्ध में भी दिया।  । पटियाला स्टेट के संस्थापक आला सिंह ब्रार एक सिख और लखना कसाना मुस्लिम थे। इन दोनों ने 1721 में 24 गांवों पर कब्ज़ा किया उसके बाद धीरे धीरे आसपास के इलाके कब्जाते गए। पटियाला स्टेट का राज्य प्रमुख हमेशा आला सिंह का वंशज और सेनापति लखना कसाना का वंशज था।  आज भी आला सिंह के वंशज पंजाब में राजनेता है जिनको हम कप्तान अमरिंदर सिंह के नाम से जानते है। पटियाला स्टेट ने मराठा और अफगान राजाओ से कई लड़ाइयां लड़ी।
    40 साल की मराठा और अफ़ग़ान से चली जंग और ऊपर से महाराजा रणजीत सिंह से खतरा लिए पटियाला स्टेट के पास अंग्रेज़ो से भी लड़ने का दम नहीं बचा था। स्टेट ने 1808 अंग्रेज़ो से हाथ मिला लिया। बाद में 1947 को इसका विलय भारत में हुआ।

    17  रामपुर स्टेट

    रामपुर स्टेट 7 अक्टूबर 1774 में अवध की संधि के परिणामस्वरूप वजूद में आई। रामपुर स्टेट की राजधानी रामपुर ही थी।
    इसकी स्थापना नवाब फैज़ुल्लाह खान ने कर्नल चैंपियन के साथ की थ फैज़ुल्लाह एक पशतून थे। वो मुग़ल दौर में भारत आगये थे। रामपुर अंग्रेज़ो का सहयोगी स्टेट बनकर रहा और अंग्रेज़ो के साथ मिलकर 1857 में ज़फर,तोपे, लक्ष्मीबाई और बख्त खान के खिलाफ लड़ा।अंग्रेज़ो के जाते ही इस स्टेट को इंडिया में ले लिया गया।

    18. रेवा स्टेट

    13000 मील वर्ग फैला रेवा स्टेट मध्य भारत का सबसे बड़ा स्टेट था। इस जगह का इतिहास 1100वी शताब्दी के आसपास का है परंतु रेवा स्टेट जिसने अंग्रेज़ो का साथ दिया उसकी स्थापन 1790 में हुई और 5 अक्टूबर 1812 में यह ब्रिटिश के अधीन हो गया फिर 1 अप्रैल 1875 से 15 अक्टूबर 1895 तक यह ब्रिटिश के प्रशासन में रहा।
    इसके राजा वाघेला राजपूत राजवंश से संबंध रखते थे। 1947 को यह इंडिया में समा लिया गया।

    19. सिरमौर स्टेट

    सिरमौर नामक राज्य का इतिहास भी 11वी सदी के आसपास का है पर 1616 में यह एक स्वतंत्र रियासत के तौर पर पुनः जीवित हुई। सिरमौर पर राजपूत राजवंश ने शासन किया।बाद में इसने भी अंग्रेज़ो के अधीन आकर 1857 में विद्रोहियों के खिलाफ अंग्रेज़ो का साथ दिया। इसे भी 1947 में इंडिया में मिला लिया गया।

    20. सिरोही स्टेट

    सिरोही स्टेट भी अन्य राजपूतो की तरह ही एक राजपूत स्टेट थी जो 1405 में वजूद में आई। 1823 में यह स्टेट अंग्रेजो के अधीन हो गयी और 1857 में इसने भी अंग्रेज़ो का साथ दिया। 16 नम्बर 1949 को इसको समाप्त करके इंडिया में मिला लिया गया।

    21. उदयपुर स्टेट

    उदयपुर स्टेट ने ब्रिटिशर्स की मदद दुसरे एंग्लो मराठा जंग में की। इसके बाद इन्होंने अंग्रेज़ो के अधीन जाने की अर्ज़ी 1805 में लगाईं जिसे अंग्रेज़ो ने तब मना कर दिया। 31 जनवरी 1818 को अंग्रेज़ो ने उदयपुर को अपने अधीन लेलिया। उदयपुर स्टेट से अंग्रेज़ो ने अपने राजनीतिक लाभ उठाये । इस स्टेट में भी 1857 को स्वतंत्रतता सेनानियो के खिलाफ जाकर अंग्रेज़ो की मदद की। इसके अंतिम राजा ने 7 अप्रैल 1949 को इंडीज़ में विलय देदिया।

    अब तक आपने जितना पढ़ा, यह स्पष्ट हो गया होगा कि अंग्रेज़ो के आने से पहले तक यहाँ एक अथॉरिटी नहीं थी। सभी ने अपने अपने देश बाँट रखे। हर देश, स्टेट या राज्य में वही होता था जो राजा या नवाब चाहता था। अंग्रेज़ो से पहले का भारत आज के भारत जैसा नहीं था जहा आने के लिए पासपोर्ट या वीसा लगता था। यहाँ के सभी राजा आपस में लड़े, मरे, कटे। इतिहास को घुमा कर आपसे अक्सर झूठ बोला जाता रहा है कि मुग़ल या मुसलमान बाहर से आये थे और भारत के हिन्दुओ पर अत्याचार किये। यह बात कोरी बकवास है वो इसलिये क्योकि यहाँ हर राजा दूसरे के लिए बाहर ही का था। मराठा के लिए अवधी बाहर का था, सिरमौर के लिए उदयपुर बाहर था। यह भी बका जाता है कि मुसलमान गद्दार थे और भारतीय राजाओ पर अत्याचार किया लेकिन ऊपर आप देख चुके हो पेशवा और लक्ष्मीबाई के खिलाफ हिन्दू और मुस्लिम दोनों राजाओ ने अंग्रेजो का साथ दिया वही बख्त खान और ज़फर ने लक्ष्मीबाई और तोपे का साथ दिया।

    100 करोड़ लोगो को साथ में लेकर चलना कठिन है पर 80 करोड़ लोगो को 16 करोड़ से भयभीत करके देश को धर्म और सम्प्रदाय में बांटकर शासन करना आसान है।

    हिंदी उस्ताद की यह अपील है कि आप धर्म के आधार पर मत बटिए क्योकि असल मुद्दा यह है कि रोज़गार, उन्नति और स्वतंत्रता है या नहीं।

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