आखिर 11 साल बाद रिहा हुए मोहम्मद रफीक जिनपर साल 2005 में दिल्ली में बम ब्लास्ट के आरोप लगे थे। अदालत ने 16 फ़रवरी गुरुवार को उनकी रिहाई के आदेश दिए। मोहम्मद रफीक उन 3 लोगो में से एक थे जिनको बम ब्लास्ट का आरोपी बता कर जेल में डाल दिया गया था।
जनसत्ता अखबार की इस रिपोर्ट अनुसार अदालत ने केवल एक ही व्यक्ति तारिक डार को ही लश्कर तैयबा से सम्बन्ध रखने के आरोप में कुसूरवार पाया था और उनको 10 साल कि सजा सुनाई थी लेकिन ट्रायल के दौरान वो अपनी सजा काट चुके थे तो अदालत ने उनको भी रिहा कर दिया। मोहम्मद रफीक और मोहम्मद हुसैन फाजिली को अदालत ने निर्दोष मानते हुए रिहाई देदी।
रफीक ने बरी होने पर न्यायाधीश को केवल इतना कहा " न्याय ज़िंदा है"। शाह की माँ का कहना है कि उनके बेटे के जीवन के बहुमूल्य कई साल बर्बाद हो गए क्या दिल्ली पुलिस उनके 11 साल देगी ? उन्होंने यह भी कहा कि उनके बेटे की शादी भी नहीं हो पायी जिसके लिए सरकार को मुआवज़ा देना चाहिए।
एनडीटीवी से बात करते हुए शाह ने कहा कि, ” मैं जानता था कि ये एक लंबी प्रक्रिया है इसमें 325 लोगों की पेशी होनी थी जिसमें वक्त तो लगता ही है लेकिन मुझे पूरी उम्मीद थी कि एक दिन मुझे न्याय जरुर मिलेगा। शाह ने कहा कि, ”जब मुझे गिरफ्तार किया गया तो मैं इस्लामिक स्टडीज में एमए कर रहा था मुझे कक्षा से गिरफ्तार किया गया। जब मैंने पुलिस को कहा कि आप मेरी कक्षा उपस्थिति रिकॉर्ड देख लीजिए लेकिन पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी।” शाह की इस बात की पुष्टि कश्मीर विश्वविद्यालय के तत्कालीन वाइस चांसलर अब्दुल वाहीद कुरैशी ने अदालत में की कि 29 अक्टूबर 2005 जिस दिन दिल्ली में ब्लास्ट हुआ उस संमय शाह अपनी कक्षा में बैठा पढ़ रहा था।
No comments:
Post a Comment