क्या आपको काबुलीवाला याद है ? एक पठान जो काबुल से आता है और भारत में ड्राई फ्रूट्स बेचता है। इसी बीच एक छोटी बच्ची से उसकी मुलाकात होती है और फिर शुरू होती है एक भावुक कहानी। इस कहानी पर बिमल रॉय , हेमेन गुप्ता निर्देशित, 1961 में फिल्म काबुलीवाला भी बना चुके है। ऐसे हज़ारो काबुली वाला आज भी पश्चिम बंगाल के कोलकता में भारत ही को अपनी ज़मीन मान कर रह रहे है। भारत में रहकर भी यह लोग अपनी परंपरा और सभ्यता नहीं भूले है।
ड्राई फ्रूट्स और गर्म कपड़ों का व्यापार करने वाले ये पठान स्वतंत्रता पूर्व अफगानिस्तान से बंगाल आये थे और यही के होकर रह गए। कोल्कता में इन्होंने व्यवसाय और आज भी वो इसी शहर में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए जिंदगी बिता रहे हैं।
इनके घरो को खान कोठी कहा जाता है और ये पठान विभिन्न संस्कृति और सभ्यता के होने के बावजूद कोल्कता में पूरी तरह घुल मिल गए है। आज के समय में कोलकाता में तकरीबन 4000 काबुली परिवार हैं और उनमें से पिछली दो पीढ़िया भारत में जन्मी है। यह शार्ट फिल्म आपके दिल को छू जाएगी
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