भारत में डिजिटल फ्रॉड बढ़ती हुई चिंताओं में से एक है और अब सुप्रीम कोर्ट इससे निबटना चाहता है। उच्चतम न्यायलय ने भारत सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है कि वह प्रीपेड फोन धारको को फोन रिचार्ज करते समय अपनी पहचान दर्ज कराने का नियम बनाये।
मुख्या न्यायाधीश जे एस खेहर ने एक याचिका दर्ज होने के बाद यह आदेश दिया। अदालत के इसके लिए १ साल का समय भी दिया है। अदालत ने प्रस्ताव रखा कि फोन रिचार्ज कराते समय धारक को आधार कार्ड द्वारा अपनी पहचान दर्ज करानी होगी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट नहीं किया कि यह नए ग्राहकों के लिए है या इसमें मौजूदा ग्राहकों को भी शामिल किया जायेगा।
आधार कार्ड भारतीय सरकार द्वारा जारी किया गया पहचान का एक दस्तावेज है जिसमे धारक की बॉयोमेट्रिक जानकारी जैसे उंगलियो के निशान और आईरिस स्कैन लिया जाता है। फ़िलहाल 100 करोड़ भारतीयों के पास आधार कार्ड है।
भारत में मोबाइल कनेक्शन के 90 फीसद ग्राहक प्रीपेड सिम इस्तेमाल करते है
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