प्रत्येक सुबह अपनी दुकान पर जाने से पहले 46 वर्षीय राजेश कुमार शर्मा दिल्ली स्थित अपने द्वारा खोले गए मेट्रो पुल के नीचे फ्री स्कूल अंडर द ब्रिज जाते है। उन्होंने ही इसका नाम फ्री स्कूल अंडर द ब्रिज रखा है।
न दीवार , न खम्बे न ही खेल का मैदान बस जितना पुल उतना स्कूल और उसमे पढ़ते है 300 छात्र। ऐसे छात्र जो गरीब है और अच्छी शिक्षा नहीं ले सकते। राजेश कहते है कि "मैंने यह स्कूल 2006 में खोला था और अब इसे 10 साल हो गए है। मैं नहीं चाहता कि यह बच्चे सिर्फ इसलिए न पढ़ पाए क्योकि यह गरीब है।"
राजेश इस स्कूल से भावनात्कमक तौर से भी जुड़े है वह कहते है : " मैं अपनी वित्तीय हालातो के कारण इंजिनीयर नहीं बन सका था। मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ा था। अब इन बच्चो में मैं वह स्वपन देखता हूँ "
इनका स्कूल दो शिफ्ट में चलता है सुबह 2 घण्टे बच्चो के लिए और दोपहर को बच्चियों के लिए

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