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    Friday, 17 February 2017

    Fake Viral Story : फ़र्ज़ी है इन्टरनेट पर फ़ैल रही हिरण और उसके बच्चो की दर्दमयी कहानी, खुद फोटोग्राफर ने किया रद्द


    चार वर्ष पहले , वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर एलिसन बटिगिग ने दिल को छू लेने वाली फोटो सिरीज़ लांच की थी जिसमे दिखाया गया था कि तीन चीता एक इम्पाला को मार रहे है।  इम्पाला असाधारण रूप से शांत दिख रही थी।  यह सभी तस्वीरें बहुत बुरी तरह इन्टरनेट पर वायरल तो हुई लेकिन जो भी इनके बारे मे प्रस्तुत किया गया वो सच्चाई से कोसो दूर था।

    झूठी कहानी यह फैलाई गयी कि इम्पाला ने अपने बच्चो के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया।  वह भाग सकती थी लेकिन जब उसने देखा कि उसके बच्चे फंस गए तो वह खुद चीता की खुराक बनने आगयी ताकि बच्चे बच जाये।  यह कहानी एक फ़र्ज़ी और झूठी कहानी है जो इन्टरनेट पर बैठे करोड़ो यूज़र्स ने वायरल कर दी। कहानी में यह तक बताया गया कि यह दृश्य देख कर इस फोटोग्राफर को मानसिक सदमा लग गया।  इन सबसे परेशान होकर फोटोग्राफर एलिसन ने अपने फेसबुक पोस्ट पर अपनी भड़ास निकाली

    एलिसन ने इसके पीछे की सच्ची कहानी लिखी।  यह रहा उनका फेसबुक पोस्ट


    वह कहती है

    " मैंने देखा कि सितम्बर 2013 में केन्या के मसाई मारा में एक चीता माँ अपने बच्चो को शिकार करना सिखा रही थी।" 


    "लेकिन चीता के बच्चे बजाये शिकार करने के इम्पाला के साथ खेल रहे थे "


    "सभी तस्वीरों में माँ चीता ही इम्पाला पर प्रहार करती हुई दिख रही है और बच्चे अपनी माँ जैसा करने की कोशिश कर रहे है "


    "इन तस्वीरों में जो असाधारण है वो यह कि इम्पाला अपनी मौत के इतने नज़दीक होते हुए भी शांत है।  यह इस कारण से हो सकता है कि वह डर के मारे हिल नहीं रही हो "


    "कुछ तस्वीरों में बिलकुल परेशान कर देने वाला दृश्य है ख़ास तौर से छटी तस्वीर जैसे कोई अपनी मृत्यु के सबसे नज़दीक रहकर सुन्दर और गर्व के साथ खड़ा हो "


    " उसकी आँखों की ललकार ज़्यादा कठोर है जबकि उसका खुद को बचाने का हित इसके ठीक विपरीत है"


    "इसने ही मुझे यह अनुपम तस्वीरों को खींचने के लिए प्रेरित किया "


    " मैं चाहती थी कि देखने वाले इम्पाला के लिए सहानुभूति रखे लेकिन उसी के साथ मैं यह भी चाहती हूँ कि प्रकृति की एक दर्दनाक झलक भी देखे"


    "आखिर में चीता माँ ने इम्पाला को उसके दर्द से मुक्ति देदी और बच्चो ने व्यंजन का आनंद उठाया "

    "क्योकि इसी तरह प्रकृति व्यवस्थाओ को व्यवस्थित रखती है 

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