
इंसानियत क्या है ? किसी की मदद शारीरिक श्रम या पैसे से कर देना ? बस यही ? खैर आज मैं आपको इंसानियत के अगले पड़ाव की एक कथा बताता हूँ जहां एक नर्स ने अजनबी लड़की के लिए अपने जिगर का एक हिस्सा दान कर दिया।
एक छोटी बच्ची , बशयर अल रशीदी जिगर से सम्बंधित बिमारी से जूझ रही थी। बिमारी इस बच्ची की जान ले लेती यदि एक सऊदी नर्स ने बच्ची को अपने जिगर के एक हिस्सा दान न दिया होता। यह ट्रांसप्लांट पिछले साल के अंतिम महीने दिसंबर 2016 में हुआ।
दानकर्ता मात्र 20 वर्षीय सऊदी नागरिक व पेशे से प्रिंस सुल्तान मेडिकल सिटी, रियाध में नर्स है उनका नाम अबीर अल अन्ज़ी है। वह पूरी तरह से बच्ची से अपिरिचित थी। जब उनको पता चला कि बशयर को एक दानकर्ता की आवश्यकता है , वह फ़ौरन बशयर के पिता के संपर्क में चली गयी।

अन्ज़ी ने बच्ची को जिगर का अंश दान करने का प्रस्ताव रखा जिसके बाद यह आपरेशन हुआ। सऊदी अरब के स्वस्थ मंत्रालय ने अन्ज़ी का धन्यवाद करते हुए उनके इस नेक काम के लिए सराहा। मंत्री ने इसे एक बच्ची की ज़िन्दगी बचाने का बेहतरीन कार्य बताया।
अन्ज़ी कहती है : " बच्ची बशयर की तस्वीर ने मुझे अंदर से झिझकोर कर रख दिया। मुझे उसके लिए दुःख हुआ। वो एक बच्ची है जो अपना दर्द भी ढंग से बयान नहीं कर सकती। मैंने सोच लिया था कि मुझे कुछ करना है और फ़ौरन उसके पिताजी से संपर्क साधा "

बशयर के पिता नफी अल रशीदी ने अल अरबिया को बताया कि "अन्ज़ी इस दान के लिए पूरी तरह मन बना चुकी थी। मैंने फ़ौरन बशयर की माँ को यह खुशखबरी दी। अन्ज़ी को जब मैंने उनके इस नेक काम के लिए बदला देना चाहा तब उन्होंने किसी भी प्रकार की मदद लेने से भी बना कर दिया। वह पूरी तरह से उदारता की एक मूरत थी "
अन्ज़ी के सम्मान में उनके शहर के लोगो ने एक कार्यक्रम भी रखा। भारत की ओर से अन्ज़ी जैसे महिला को सलाम
Jazakallah
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