आपने अपने जीवन में चिड़ियाघर या zoo ज़रूर देखा होगा या उसके बारे में जानते तो होंगे ही। चिड़ियाघर से हम समझते है एक ऐसी जगह जहां ऐसे जंगली जानवरो को कैद करके रखा जाता है जिनसे आमतौर पर हमारा पाला नहीं पड़ता। लोग चिड़ियाघर जाते है जानवरो के बर्ताव , रहन सहन और खुद उन जानवरो को करीब से देखने के लिए। लेकिन क्या आप जानते है कि चिड़ियाघर में हमेशा जानवर ही नहीं बल्कि इंसानो को भी रखा जा चुका है। ऐसे ही चिड़ियाघरो की 15 तस्वीरे हम आपको दिखा रहे है जिन्होंने मानवता को 1000 बार कलंकित किया। इससे ज़्यादा शर्मनाक कुछ हो सकता है ?
सुनने में अविश्वसनीय है लेकिन यह महज़ चंद दशको पहले ही हो चुका है जहां इंसानो को पकड़ कर रखा जाता और नुमाइश के तौर पर दुनिया को दिखा कर पैसा कमाया जाता था
यह 15 तस्वीरे आपको मानवता का काला चेहरा दिखाएंगी।
1. सेलकनम जाति के एक जोड़े को यूरोप लाने के बाद यह तस्वीर ली गयी। सेलकनम अर्जेंटीना के मूलनिवासी जाति है। यूरोप में इनको जानवरो की तरह लाकर चिड़ियाघर में बंद कर दिया गया।
2. कार्ल हैगेनबेक , यह वही शख्स था जिसने चिड़ियाघर का कांसेप्ट दिया था , अपने द्वारा पकडे गए 11 सेलकनम मूलनिवासियो को जंजीर में जकड कर फोटो खिंचवाता हुआ।
3. ह्रदय को झंझोड़ती हुई बेल्जियम के ब्रसल में स्थित एक "मानव चिड़ियाघर" में प्रदर्शनी में लगी एक अश्वेत बच्ची। यह तस्वीर 1958 की है।
4. कांगो देश की पिग्मी जनजाति का युवा जिसका नाम ओटा बेंगा था , को अमेरिका के ब्रोंक्स ज़ू में रखा गया था।
5. यह मानव चिड़ियाघर पेरिस में स्थित था इसका नाम " जार्डिन द अग्रोनोमि ट्रॉपिकल " था।
6. जार्डिन को महज़ 6 माह में 10 लाख से ऊपर आगंतुक मिल चुके थे। इसको फ्रांस ने अपनी कॉलोनियल ताकत दर्शाने के प्रतीक मे बनवाया था।
7. यह चिड़ियाघर एक तरह से कई गाँवों के रूप में बनाया गया था जो अलग अलग जातियो के रहन सहन को दिखाता था। इसमें ग्रामीणों को प्रदर्शनी के तौर पर रखा गया था। यह सब लोग वहां गाँव ही की तरह रहते थे।
8. 2006 में इसको दोबारा केवल बगीचे के तौर पर खोल गया लेकिन इसके एक काले इतिहास के कारण अब कोई यहाँ जाना पसंद नहीं करता।
9. यह सारा बार्टमैन है , इसको तंग कपडे पहनाकर प्रदर्शनी में खड़ा किया गया था। जब यह चल बसी तो इसके सामान को 2002 तक पेरिस की म्यूजियम ऑफ़ मैनकाइंड में रखा गया। बाद में नेल्सन मंडेला ने उसे हटा देने को कहा।
10. एक माँ अपने बच्चे के साथ जर्मनी के नीग्रो विलेज में बतौर नुमाइश।
11. उसी नीग्रो विलेज की यह दूसरी तस्वीर है जहां आप अमानवीय घटना देख सकते है कि कैसे बाहरी लोग आकर इन लोगो को देखते और आनंदित होते थे।
12. पकड़े गए अफ्रीकी और एशियाई मूल के लोगो को जमा करके उनकी एक तस्वीर।
13. पेरिस विश्व मेले में मूलनिवासी लोगो को बतौर नुमाइश रखा गया।
14. ऐसे ही विश्व मेले में पिग्मी जनजाति के लोगो को जबरन नचवाते हुए।
15. कई प्रजातियों के भाग्य में यह दुःख आया। चिली की 5 इंडियन जातियो को भी 1881 में यूरोप में लाकर प्रदर्शन में लगा दिया गया।
इंसानो को पकड़कर अपने निजी चिड़ियाघर में लाकर मनोरंजन हेतु उनकी नुमाइश लगाना और पैसा कमाना , यह बात कितनी भयावह लगती है। सोचिये कि मानव ने आखिर मानव के ही साथ क्या किया ? शुक्र है अभी इस तरह की प्रैक्टिस तो बंद हो गयी है लेकिन आज भी दुनिया के बड़े हिस्से में इसके बीज हमारे दिलो में रह गए है। हम रंग, नस्ल और जाति के आधार पर आज भी भेदभाव कर रहे है।
सोचिये क्या हम खुद को मानव कहलाने लायक रहे है ?

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