भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने 11 फरवरी को बयान देते हुए उन्नाव में वायदा किया कि यदि भाजपा प्रदेश में चुनाव जीतती है तो सभी बूचड़खाने बंद करा देगी जबकि हकीकत यह है कि उन्नाव खुद चमड़ा और बीफ एक्सपोर्ट व्यवसाय पर निर्भर है।
अमित शाह ने कहा है कि सभी कसाईखाने 12 मार्च की रात से बंद हो जायेंगे यदि भाजपा प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रही। विदित हो नतीजे 11 मार्च को जारी किये जायेंगे। भाजपा ने पहले ही अपने मेनिफेस्टो में इस बात का वर्णन किया है कि सत्ता प्राप्ति के पश्चात नाजायज़ कसाईखाने बंद होंगे।
उन्नाव भारत का एक बड़ा औद्योगिक शहर है जो अपने चमड़े , केमिकल और मछरदानी के उत्पादनो को लेकर विख्यात है। कसाई खाने बंद होने का मतलब चमड़ा उद्योग पर ख़ासा प्रभाव पड़ना बताया जा रहा है। वहा लगे सैकड़ो छोटे मोटे उद्यम बंद हो जायेंगे जो फिर यही बात दर्शाता है कि भाजपा को आर्थिक उन्नति से कोई मतलब नहीं या यह भी बस एक जुमलागिरि ही है जैसी पिछले 3 वर्षो से देशवासी झेल रहे है। क्योकि इसके बाद सवाल यही उठता है कि यदि उत्तर प्रदेश के कसाई खाने बंद करने की इतनी होड़ मची है तो महाराष्ट्र के कसाईखाने में से क्या "शाकाहारी मांस" निकल रहा है ??
आर टी आई रिपोर्ट्स अनुसार भारत में मिल्क प्रोसेसिंग फैक्ट्री और लिक्विड मिल्क प्लांट , दोनों से ज़्यादा कसाई खाने चल रहे है इनकी तादाद 1623 है जबकि भारत में 213 रजिस्टर्ड मिल्क प्रोसेसिंग कारखाने और 793 लिक्विड मिल्क प्लांट्स है
मज़ेदार बात यह है कि महाराष्ट्र जहां फिलहाल भाजपा की सरकार है वह सबसे ज़्यादा 316 कसाईखाने चल रहे है। इसके बाद उत्तरप्रदेश और तमिलनाडु में 285 और 130 है। मौजलेने की एक बात यह भी है कि तमिल नाडु में भाजपा और ए आइ ए डी एम् के की गठबंधन में सरकार चल रही है। जम्मू कश्मीर , गोवा और अरुणाचल की बात आप करिये ही मत जहां आपको आसानी से बीफ खाने को मिल सकता है इनमे से गोवा में भाजपा की सरकार है और जम्मू कश्मीर में गठबंधन की सरकार है।
इससे यह साफ हुआ कि अच्छे दिनों की तरह यह भी एक जुमला है जिसकी पुष्टि खुद अमित शाह कर चुके है जब उनसे पुछा गया था अच्छे दिन के बारे में तो उन्होंने कहा था : वह तो एक जुमला था।
आप जुमले और मौज दोनों संग संग लेते रहिये

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