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    Friday, 17 February 2017

    भारत के सभी न्यायधीशों के नाम खुला ख़त : श्री मेहंदी हसन ऐनी रायबरेली


    उत्तर प्रदेश से सम्बन्ध रखने वाले श्री मेहंदी हसन ऐनी रायबरेली साहब एक पत्रकार एवं कार्यकर्ता है जो समय समय पर हक़ एवं इन्साफ की आवाज़ उठाते है।  कुछ दिनों पहले भारत के मध्यप्रदेश से 11 isi एजेंट्स को पकड़ा गया था जो भारत के टुकड़ो पर पल कर पाकिस्तान की नमक हलाली कर रहे थे। इन 11 एजेंट्स में से एक ध्रुव सक्सेना भाजपा से सम्बंधित भी बताया गया और आउट लुक अख़बार के मुताबिक यह तार विहिप तक जा पहुचे लेकिन इन सब बड़ी घटनाओ को लेकर मिडिया का कोई पैनल न तो ज़मीनी रिपोर्टिंग पर आमादा है न ही डिस्कशन करने को। मेहँदी हसन का यह पत्र मात्र एक व्यक्ति का सवाल नहीं है , बल्कि करोडो अल्पसंख्यको की चीख है जो मुझे लगता है की कभी न कभी तंत्र द्वारा सुनी जाएगी।






    मेहँदी हसन कहते है

    "भारत के सभी न्यायधीशों के नाम खुला ख़त
    योर अॉनर
    ठीक 11 साल पहले 29 अक्तूबर 2005 को दिल्ली में बम धमाके होते हैं और हमेशा की तरह से मुस्लिम नौजवानों को मोस्ट वांटेड टेरेरिस्ट बना कर उठा लिया जाता है,
    फिर मीडिया की हेडिंग बताती है कि ओसामा का राईट हेंड पकड़ा गया,स्पेशल एजेंसियां कहती हैं कि गिरफ़्ताार लड़के कुख्यात आतंकी थे,पूरा देश उड़ाने की फिराक़ में थे, मुक़दमे चलते हैं,सुनवाईयां होती हैं,लड़कों के घर वालों को टारगेट किया जाता है,उनके बाप को फालिज अटैक पड़ता है,मां पागल हो जाती है,बहनें इंसाफ़ की देवी को पुकारती रहती हैं,खुदा से आस लगाये अपने भाईयों के बेकुसूर होने का बिपता सुनाती फिरती हैं,.
    लड़कों के चेहरे ढक कर कभी कोर्ट कभी तिहाड़ कभी रिमांड पर भेजा जाता है,
    और हर मरतबा मीडिया अंडर ट्रायल क़ैदियों को दुनिया के बड़े आतंकियों में शुमार करके मिर्च मसाला लगाती है.
    लोग उम्मीद हार बैठते हैं,
    इंसाफ़ का तराज़ू ऊपर नीचे होने लगता है,
    चक्की पीसते पीसते साजिद और रफ़ीक़ खूद को मुलज़िम के बजाये मुजरिम समझने लगते हैं,
    फिर भी उन्हें ये यक़ीन होता है कि इंसाफ़ मिलकर रहेगा.
    उनकी बेगुनाही साबित हो कर रहेगी.
    यही यक़ीन उनके नसों में लहू बन कर दौड़ता है.
    और फ़िर एक दिन अचानक आप "नो गिल्टी" कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं....
    क्यों? आख़िर एैसा क्यों?
    हर मुल्ज़िम को आप 10 से 15 साल बल्कि कुछ को20 साल तक सलाख़ों के पीछे डालकर फिर बाईज़्ज़त बरी क्यों कर देते हैं?
    योर अॉनर 
    आप अपनी अदालत में हमेशा खुद सवाल करते हैं,पर जनता की अदालत में आज आपसे दो सवाल हैं,
    मी लॉर्ड शायद जवाब ना हो आपके पास क्योंकि आप भी किसी के ग़ुलाम हैं,
    फिर भी मैं सवाल तो कर ही लेता हूं,
    01.इन बेगुनाहों को जिन्होंने अपनी ज़िंदगी का बेशक़ीमत हिस्सा 
    ना करदा गुनाह के नतीजे में जेल की चक्कियां पीसने में बिताई हैं,और इनका जो मी़डिया ट्रॉयल हुआ,इन्हें कुख्यात आतंकी बता दिया गया,
    सदमें में इनके कितने अपनों ने जान गंवा दी,या अपाहिज हो गये,इन सबका ज़िम्मेदार कौन है?इसकी तलाफ़ी कैसे होगी?क्या आपका नो गिल्टी कह देना ही काफ़ी होगा? 
    02.अगर ये लड़के मुजरिम नहीं थे तो उन धमाकों के पीछे कौन था? आपके सिस्टम ने,आपके क़ानून ने और आपके देश की एजेंसियों ने किन मुजरिमों को बचाया है और किन बेगुनाहों को फंसाया है? इस का सवाल कौन उठायेगा? और जवाब कौन देगा?
    योर अॉनर
    शायद अभी आप ये जवाब ना दें,लेकिन वक़्त आप को जवाब देने पर मजबूर करेगा.
    अब भी समय है,आप लोग जवाबदही और ज़िम्मेवारी तै करिये,मोरल डॉऊन होने की दलील देकर पुलिस,स्पेशल सेल,और सिक्योरिटी एजेंसियों और खुफ़िया विभागों को बेगुनाहों की ज़िंदगियों से खिलवाड़ करने की इजाज़त देना,उन्हें बार बार मार कर जिंदा करना और ज़िंदा लाश बना देना कहां का लोकतंत्र है? और कहां का इंसाफ़ है?
    योर अॉनर
    हम मुसलमान हर हाल में अपने खुदा का शुक्र अदा करते हैं,जानलेवा मुसीबत आने पर भी सब्र करते हैं.
    इस लिये साजिद और रफ़ीक़ और उन जैसे हज़ारों बेगुनाह जिन्होंने अपनी जवानी जेल की कोठरियों में बग़ैर किसी गुनाह के गुज़ार दी हैं वो सब्र कर लेंगें,
    और सभी को मुआफ़ भी कर देंगें,
    पर कम से कम आप तो वय्वस्था की संवेदनशीलता के पतन को रोकिये,
    लोकतंत्र को शर्मसार होने से बचाईये.
    और क़ानून पर यक़ीन को बरक़रार रखने का काम करिये..
    शुक्रिया"

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