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    Monday, 13 February 2017

    कश्मीरी पण्डित बंगलों में और मुज़फ्फरनगर वाले मुसलमान जंगलों में क्यों?


    चुनावो के समय में आलोचनाओ और विरोधों का दौर चल पड़ता है और जब बात उत्तरप्रदेश चुनावो की हो तो मुजफ्फरनगर दंगो का ज़िक्र नहीं होगा , ऐसा सोचना गलत है।  फेसबुक पर मौजूद कई यूज़र अपने अपने हिसाब से सरकारों पर तंज़ कसते व सवाल उठाते है उनमे से एक दलित चिंतक पत्रकार दिलीप सी मंडल भी है।  

    दिलीप मंडल अपनी ताज़ा पोस्ट में मुजफ्फरनगर दंगो में लुट चुके मुसलमानो और कश्मीरी पंडितो को दी गयी सरकारी सुविधाओ की तुलना करते है।  वह कहते है कि कश्मीरी पंडितो को पक्के आवास मुहैया कराये गए है तथा विश्विद्यालयों में आरक्षण है लेकिन मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के साथ ऐसा नहीं है। 

    उनका सवाल है कि जब देश में कानून सभी के लिए समान है तो विस्थापितों को लेकर ऐसा क्यों ? अब यह सवाल उन्होंने क्या सोच कर उठाया या इसमें उनका अपना क्या अजेंडा है वो बात भी काबिले गौर हो सकती है लेकिन कश्मीरी पंडितो को सुविधा दी जा रही है तो यह सराहनीय कदम है।  इसकी तुलना मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से नहीं कर सकते क्योकि मात्र एक तस्वीर से सच्चाई बयान नहीं की जा सकती।  

    कश्मीरी पंडितो को विस्थापित हुए 20 वर्ष से अधिक हो गए है उनको भी शुरू में ऐसी दिक्कते हुई होंगी और इन 20 वर्षो में उनका भी धीरे धीरे विकास हुआ होगा। खैर दिलीप साहब का पोस्ट आपके सामने है।  अपनी प्रतिक्रियाएं अवश्य दीजिये 

     

    "मुज़फ़्फ़रनगर बाकी है!
    अपने मतदाताओं का बीजेपी कैसे और कितना ख़्याल रखती है, यह जानना हो तो अनंतनाग या कहीं और बनी कश्मीरी पंडितों की कॉलोनी को देखना चाहिए। यह तस्वीर ग्रेटर कश्मीर अखबार में छपी है। उन्हें हर महीने नियमित रक़म मिलती है। बिज़नेस करने के लिए उन्हें जगह दी गई है। यूनिवर्सिटी में सीटें रिज़र्व है।

    हालात यह है कि हालात बेहतर होने और वहाँ बीजेपी-पीडीपी की सरकार बनने के बावजूद वे अब वापस जाना नहीं चाहते। संविधान हर किसी को आजादी देता है कि वह जहाँ चाहे, वहाँ रहे।वहीं, मुज़फ़्फ़रनगर के दंगा पीड़ितों की टेंट कॉलोनी को देखिए।ये किनके वोटर थे? क्या वे इस बर्ताव के हक़दार हैं? किसी भी पार्टी ने इनकी परवाह नहीं की। न सपा ने, न बसपा ने, न कांग्रेस ने। और बीजेपी तो इन्हें अपना वोटर मानती नहीं है।

    इसलिए तो कहते है के,

    विस्थापित कश्मीरी पंडित बंगलो में,
    मुज़फ्फरनगर वाले मिया जंगलो में।

    #काम_बोलता_है"
    दिलीप सी मण्डल



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