काज़ीरंगा राष्ट्रीय पार्क गैंडो के संरक्षण को लेकर मशहूर हो चुका है क्योकि इस पार्क ने गैंडो को विलुप्त होने से बचाने में काफी बढ़िया भूमिका निभाई है। आज इस पार्क में 2400 से ज़्यादा गैंडे है जो पूरी दुनिया की लगभग दो तिहाई आबादी है। इस काम के लिए निसंदेह काजीरंगा पार्क का शुक्रिया किया जाना बनता है लेकिन इस कहानी के पीछे एक कहानी और है जो ज़्यादा डरावनी है।
| फोटो साभार : बीबीसी |
इस पर बीबीसी ने रिपोर्ट जारी की है और जिसमे बताया है वर्ष 2015 में 50 से ज़्यादा तथाकथित शिकारियों को रेंजर्स ने मार गिराया है। गैंडो का शिकार उसके सींग के लिए किया जाता है क्योकि ऐसा मानना है कि यह सभी बीमारियों की दवा है। इसकी प्रति 100 ग्राम की कीमत 6000 डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 4 लाख रुपए है।
यह बात सही है कि गैंडो को सुरक्षा चाहिए लेकिन काज़ीरंगा पार्क द्वारा किसी मारकर किसी भी तरह की सज़ा या जवाबदेही से बच निकलना कहा तक सही है ? क्या गारंटी है कि 2015 में मारे गए सभी 50 लोग शिकारी ही थे ?
पार्क के निर्देशक डॉ सतेन्द्र सिंह का कहना है कि :
"शिकारियों से लड़ना एक मुश्किल चुनौती है। पड़ोसी राज्य से शिकारी आते है और स्थानीय ग्रामीण लोगो को पैसे का लालच देते है। उनकी सहायता से शिकारी पार्क में घुस जाते है। "
डॉ सिंह ने आगे कहा की :
"शूट ऑन साइट का मतलब यह नहीं कि हम देखते ही गोली मार देते है , पहले हम उनको रोकते है और पूछते है कि वह कौन है ? यदि वह फायरिंग करते है तब हमे जवाबी कार्यवाही करनी पड़ती है।"
| काचू कीलिंग का बेटा उनका आखरी सहारा था |
लेकिन स्थानीय लोगो का आरोप है कि बेगुनाह लोगो को भी मारा गया है ऐसे ही एक दम्पति ने बताया कि उनके बेटे गौनबरा को 2013 में मार दिया गया था। गौनबरा के पिता काचू कीलिंग ने बताया कि :
"उनका मानसिक तौर से पीड़ित बेटा गलती से पार्क में घुस गया था क्योकि पार्क में किसी तरह की फेन्स या जाली नहीं लगी थी।"
पार्क अधिकारियों ने कहा कि गौनबरा के द्वारा सही जवाब न मिलने और चेतावनी पर न रुके जाने पर उसे गोली मारनी पड़ी। वही काचू कहते है कि उनके बेटे को इलाके में सब जानते है कि वह मानसिक रूप से पीड़ित था।
काचू कहते है कि वह अब कुछ नहीं कर सकते क्योकि पार्क के रेंजर्स के पास ख़ास शक्तियां है। उन्हों ने कहा : " मैं गरीब आदमी हूँ मैं अदालत के चक्कर भी नहीं लगा सकता इसलिए मैंने अदालत का दरवाज़ा भी नहीं खटखटाया "
| नन्हा आकाश अब चल नहीं सकता |
इसके बाद स्थानीय कबीलाई लोगो ने विरोध प्रदर्शन किया जो उग्र हो गया भी लोग मारे गए। बताइये क्या करेंगे आप ? इस सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश में जहां जानवरो को बचाने की होड़ में इंसानो के अधिकार कुचले जा रहे है। असल में काजीरंगा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैलानियों का पसंदीदा स्पॉट है। प्रति वर्ष एक लाख सत्तर हज़ार सैलानी इस पार्क में घूमने आते है जो राज्य के आमदनी का बड़ा हिस्सा है। अब इसी से आप समझ जाइये कि पार्क प्रशासन पर कितना राजनैतिक दबाव होगा।
आप पूरी खबर बीबीसी के इस आर्टिकल में देख सकते है साथ ही पुलिस द्वारा प्रदर्शन कर रहे महिलाओ की पिटाई और उनके घरो को तोड़ते हुए विडियो बीबीसी के इस लिंक पर देख सकते है
यह भी पढ़िए
दूर रहने वाले अपने प्रियजनों को चुम्बन भेजने की सुविधा देगा यह किसिंजर एप्प और गैजेट
मेरे बालों को पकड़ा, जूते से मारा फिर भी तसल्ली नही हुई तो आँखों पर पैलेट गन चला दी-इफरा शकूर
फिर दिखी बजरंगियो की गुंडई , बिहार में की मारपीट तो झारखण्ड में लगवाए दंड बैठक
नासा ने जारी किया अंतरिक्ष में घूमती आवाज़ो का ऑडियो , कर देगा आपके रोंगटे खड़े (Please Use Earphone)
No comments:
Post a Comment