अडोल्फ हिटलर , एक ऐसा नाम जिससे हर व्यक्ति परिचित है क्योकि उसने अपने कार्यकाल में लगभग 60 लाख लोगो की हत्या करवाई। आज भी यदि मैं आपसे पूछू कि दुनिया का सबसे घटिया शासक कौन था तो आप भी हिटलर का नाम लेंगे लेकिन इसी दुनिया में हिटलर से करीब 50 साल पहले एक ऐसा शासक भी था जिसने हिटलर से दुगने लोगो को मारा और उसके बारे में कोई नहीं जानता क्योकि जब मरने वाले "अश्वेत या मूल निवासी" हो तो मारने वाले को कोई हिटलर नहीं कहता ।
वो आदमी 1 करोड से ज़्यादा लोगो की मौत का ज़िम्मेदार है। वो आदमी अफ्रीका के बड़े हिस्से को गुलामी में ढकेलने के लिए ज़िम्मेदार है। वह आदमी इंसानो के हाथ काटने को लेकर कुख्यात है और वह आदमी ऐसा है जिसका नाम हम नहीं जानते। वह आदमी है बेल्जियम का किंग लियोपोल्ड द्वितीय।
लियोपोल्ड द्वितीय 1865 में बेल्जियम का राजा बना था और बाकी यूरोपियन्स की तरह उसने भी अपने साम्राज्य को अफ्रीका तक बढ़ाया। जब वह राजा बना तो कई लोगो ने आपत्ति जताई थी। खुद उसकी कज़न क्वीन विक्टोरिया ने उसे "नालायक , सुस्त और निराशात्मक" कहा था। किंग लियोपोल्ड ने भी कभी इससे इनकार नहीं किया कि वह बच्चियों का शोषण करता था।
उस समय बेल्जियम क्रांति के उथल पुथल समय के बीच में था। सरकार ने निर्णय लिया कि लियोपोल्ड को अगर अफ्रीका में अपना साम्राज्य बनाना है तो उसे अपने इस स्वपन के लिए खुद ही वित्त प्रबंधन करना होगा।
अपने संपर्क सूत्रों और कूटनीतिक कौशल के बल पर उसने यूरोपियन राजाओ को मना लिया कि उसे कांगो दिया जाए - वह जगह बेल्जियम से 76 गुना बड़ी थी।
लियोपोल्ड का परम उद्देश्य बस ज़मीन के संसाधन को बुरे तरीके से लूट कर पैसा कमाना था। हालात तब और ज़्यादा बिगड़ गयी जब उसने कोन्गोवासियो को रबर उद्योग में डाल दिया।
कांगो के पुरुषो को बाध्य किया गया कि वह रबर के पेड़ की छालो को छील कर उसमे से रबर बनाने वाला पदार्थ निकाले। जब मज़दूर ऐसा करते तो उनका शरीर और बाल उस चिपचिपे पदार्थ से ढक जाते थे
प्रत्येक गाँव को एक कोटा पूरा करना होता था जिसके लिए स्थानीय पुलिस को लगा रखा था। कोटा पूरा न होने पर लोगो को मार दिया जाता था।
इसकी पुष्टि करने के लिए कि पुलिस गोलियों को शिकार में व्यर्थ न करे , सिपाहियों को भी हर गोली का हिसाब देना होता था कि गोली केवल कांगो वासी की हत्या में ही खर्च हुई है । हर गोली का हिसाब नहीं दे सकने की सूरत में उनको कटे हुए हाथ दिखाने पड़ते थे।
यदि पुरुष कोटा पूरा नहीं करता था तब स्थानीय पुलिस उनकी औरतो और बच्चो के साथ शारीरिक दुष्कर्म भी करती थी साथ ही पुरुष समेत पूरे गाँव को मार दिया जाता था।
विलियम हेनरी शेपर्ड , एक मिशनरी थे, ने यह पूरा मंज़र अपनी आँखों से देखा और इसको अपनी डायरी में लिखा। उन्होंने कई गाँवों का दौरा किया और ग्रामीणों के साथ साथ स्थानीय पुलिस से भी बात की।
जान बचाकर भागे एक मज़दूर जिसका नाम लुम्बा कूसा था ने बताया कि उसे 60 गुलाम और रबर का कोटा पूरा करने के काम में लगा दिया लेकिन जब वह विफल रहा तो पुलिस ने 80 से 90 मज़दूरों को जान से मार दिया
शेपर्ड को वह झोपड़िया दिखाई गयी जो केवल बलात्कार के लिए बनाई गयी थी। एक दूसरी झोपडी में 80 कटे हुए हाथ लटक रहे थे।
आखिरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते बेल्जियम को कांगो पर पुनर्मूल्यांकन करना पड़ा और लियोपोल्ड का अत्याचार 1908 में समाप्त हुआ।
लियोपोल्ड आधिकारिक तौर पर 1 करोड़ से ज़्यादा लोगो का हत्यारा बना। कुछ आंकड़े कहते है कि डेढ़ करोड़ लोगो की मृत्यु उसकी नीतियों के कारण हुई और सबसे आश्चर्य की बात यह है कि लियोपोल्ड ने कभी उस ज़मीन पर कदम भी नहीं रखा जो उसके लालच की पीड़ित बनी
1909 में लियोपोल्ड मर गया और लोगो ने यह समारोह अति धूमधाम से मनाया।
मैं आशा करता हूँ इतिहास की किताबे लियोपोल्ड द्वितीय के बारे में विस्तार से आने वाले बच्चो को सिखाएगी।
अफ्रीका पर यूरोप का कॉलोनाइज़ेशन भ्रष्टाचार, लालच और मृत्यु पर खींचा गया था। मैं यह भी आयशा करता हूँ कि अंतरराष्ट्रीय ताकते इस घटनाओ से सीखे और हर उस देश का मिलकर मुकाबला करे जो संसाधनों के लिए अपने ही मूलनिवासियो को मार रहे है।
आपसे अनुरोध है यह जानकारी अपने सभी दोस्तों को दें
अब आप किसी अत्याचारी को हिटलर कहने के साथ साथ हिटलर को भी लियोपोल्ड कह सकते हो। ऐसा सिर्फ 100 वर्षो पहले हुआ और यह मानवता पर कलंक है

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