जब आप बीमार होते है तब पहली बात जो आपके दिमाग में आती है वो यह कि अब आपके परिवार पर एक बोझ बढ़ जायेगा। ऐसा इसलिए भी क्योकि दुनिया भर में इलाज प्रतिदिन महंगा होता जा रहा है। इससे बुरी हालात बर्मा में है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के मुताबिक बर्मा दुनिया के 191 "जनरल हेल्थ केयर सिस्टम परफॉरमेंस " सूची में 190 पर है। बर्मा की सरकार अपनी जीडीपी का कुल 2.8 प्रतिशत ही हेल्थ केयर में व्यय करती है जो दक्षिण पूर्व एशिया में सबसे कम है। बर्मा में मलेरिया और अन्य बीमारियों से मौत एक आम बात है।
1937 में बर्मा के कुछ मुसलमानो ने कदम बढ़ाते हुए " मुस्लिम फ्री हॉस्पिटल " की नींव रखी। यह हॉस्पिटल उन्होंने अपने निजी बचत से शुरू किया। इसका एक ही उद्देश्य था - सभी धर्म के बीमार लोगो को मेडिकल सुविधा देना। यही उद्देश्य आज भी बरकरार है। आज भी इस हॉस्पिटल में गरीबो को दवाइयां मुफ्त दी जाती है या मामूली दर उनसे वसूली जाती है जो पैसे चुकाने में समर्थ है।
यह अपने आप में विशेष में क्योकि बर्मा में मुसलमानो की हालात किसी से ढकी छुपी नहीं है। मुस्लिम बर्मा में महज़ 4 फीसद है। राखिन प्रान्त में रोहिंग्या मुसलमान सदियो से अत्याचार झेलने पर मजबूर है। वहां सरकार तक उनको अपना नागरिक नहीं मानती और वो सभी आज स्टेटलेस माइनॉरिटी में बदल चुके है। उनके पूरे गाँव सरकारी फौजो ने नष्ट कर दिए है। यहाँ तक कि यूनाइटेड नेशन इन लोगो को "सबसे ज़्यादा दुर्व्यवहार झेलने वाली माइनॉरिटी" घोषित कर चुकी है। एमेनेस्टी इन्टेरशनल के दक्षिण पूर्व एशिया एंड पसिफ़िक के डायरेक्टर राफेनडी जमिन कहते है : " पुरुष , महिलाये , बच्चे यहाँ तक की पूरे परिवार यहाँ तबाह किये जा चुके है "
ऐसे में मुस्लिम फ्री हॉस्पिटल भाईचारे , निष्ठा , त्याग , प्रेम का प्रतीक है। यह पूर्ण रूप से मुसलमानो द्वारा दिए गए चंदे पर चलता है। इसकी आय का मुख्या स्रोत्र ही ज़कात , फितरा और खैरात जैसे इस्लामी स्तम्भ है। प्रतिवर्ष यह हॉस्पिटल,जो एक बुद्धिस्ट मेजोरिटी देश में चलाया जाता है , 4 लाख डॉलर व्यय कर डालता है।
कट्टरवाद और द्वेष से भरी इस दुनिया में मुस्लिम फ्री हॉस्पिटल हम सबके लिए एक ज्योति है। यह हमे सिखाता है कि दूसरो के द्वारा गलत परिभाषित होने पर भी हमे अपने कर्तव्य को भूलना नहीं चाहिए। अँधेरे का मुकाबला उजाले से करना चाहिए। नफरत को मोहब्बत में बदलने के कदम उठाने चाहिए।
जब आप बीमार होते है तब पहली बात जो आपके दिमाग में आती है वो यह कि अब आपके परिवार पर एक बोझ बढ़ जायेगा। ऐसा इसलिए भी क्योकि दुनिया भर में इलाज प्रतिदिन महंगा होता जा रहा है। इससे बुरी हालात बर्मा में है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के मुताबिक बर्मा दुनिया के 191 "जनरल हेल्थ केयर सिस्टम परफॉरमेंस " सूची में 190 पर है। बर्मा की सरकार अपनी जीडीपी का कुल 2.8 प्रतिशत ही हेल्थ केयर में व्यय करती है जो दक्षिण पूर्व एशिया में सबसे कम है। बर्मा में मलेरिया और अन्य बीमारियों से मौत एक आम बात है।
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